शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

परमाणु विमानवाहक पोत भारत बनायेगा

।नौसेना की ताकत बढ़ाने तथा उसे अत्याधुनिक बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए भारत दस अरब डॉलर की लागत से अमरीका की तर्ज पर परमाणु इंजन से चलने वाला विमानवाहक पोत बनाएगा।नौसेना के सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत देश के पहले परमाणु इंजन संचालित विमानवाहक पोत को बनाने के लिए नौ भारतीय शिपयार्डों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। इस पोत को आईएसी-2 नाम दिया गया है और यह 65000 टन श्रेणी का होगा।इसका फ्लाइट डेक 'केटापुल्ट टेक ऑफ' प्रणाली से लैस होगा। इस प्रणाली में उड़ान भरने के लिए विमान को रनवे पर गुलेल की तरह धक्का मारकर छोड़ा जाता है। इस प्रणाली का इस्तेमाल अमरीका में आम तौर पर किया जाता है।भारतीय शिपयार्डों से प्रस्ताव मांगेसूत्रों ने बताया, 'नौ भारतीय शिपयार्डों से इस परियोजना के तहत प्रस्ताव मांगे गए हैं और उन्हें 21 जुलाई तक ये प्रस्ताव देने हैं।'नौसेना ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है जो इन शिपयार्डों की निर्माण क्षमता का अध्ययन करेगा। इस समिति को सितम्बर के अंत तक रिपोर्ट देने को कहा गया है।सूत्रों के अनुसार, समिति की अध्यक्षता रियर एडमिरल सुरेन्द्र आहूजा करेंगे, जो संयोग से आईएसी-2 के लिए गठित अध्ययन समूह के भी अध्यक्ष थे। इस परियोजना के लिए पांचों सरकारी शिपयार्डों एमडीएल, जीआरएसई, जीएसएल, सीएसएल और एचएसएल तथा चार निजी शिपयार्डों एल एंड टी, पिपावा, एबीजी शिपयार्ड और भारती शिपयार्ड से प्रस्ताव मांगे गए हैं।आईएसी-2 होगा सबसे बड़ा युद्धपोतयह मोदी सरकार की मेक इन इंडिया योजना के तहत सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक होगी। आईएसी-2 भारतीय नौसेना के बेड़े का सबसे बड़ा युद्धपोत होगा। अभी नौसेना के पास दो विमानवाहक पोत आईएनएस विराट और आईएनएस विक्रमादित्य हैं।इसके अलावा पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के समुद्री परीक्षण किए जा रहे हैं। आईएनएस विराट पर विमानों के उड़ान भरने के लिए सटोवल तथा विक्रमादित्य पर उड़ान भरने के लिए स्काई जंप तथा उतरने के लिए एरेस्टेड रिकवरी प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रणाली को सटोबर कहा जाता है।