Loot price flipcart

Showing posts with label Misail. Pinaka मिसाईल पिनाका ताकत. Show all posts
Showing posts with label Misail. Pinaka मिसाईल पिनाका ताकत. Show all posts

Sunday, 16 December 2018

रफेल सौदे पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद राहुल गांधी जी को चुनावी परिणामों के मध्य आईना दिखाती नई कविता

रफेल सौदे पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद राहुल गांधी जी को चुनावी परिणामों के मध्य आईना दिखाती नई कविता
🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥
चौकीदार चोर बतलाया
गला फाड़ कर चिल्लाए,
चोर-चोर कहते कहते
तुम तीन प्रदेश जीत लाये ।

मूरख जनता बहकावे में
साथ तुम्हारे चल बैठी,
कुछ जनता नोटा के
चक्कर में खुद को ही छल बैठी ।

60 साल का लुटा कृषक
बस 4 साल में टूट गया,
गुस्सा सारे नेताओ का
भाजप्पा पर फूट गया ।

तुम रफेल और बस रफेल
पर भाषण देकर सिद्ध हुए,
घायल तन पर चोंच मारते,
अवसरवादी गिद्ध हुए ।

तुक्का लगकर जीत गए हो
भली तुम्हारी राम करे,
बकरे की माँ कब तक
खैर मनाकर के आराम करे ।

धीरे-धीरे रहो देखते
परतें सब खुल जाएगी,
एक साल के अंदर ही
सबकी आंखे सब खुल जायेंगी ।

रिहा जमानत पर जो राहुल
हरिश्चन्द्र का पौत्र हुआ,
दादा शुद्ध पारसी जिनका
बामन उनका गोत्र हुआ ।

छद्म विरासत वाले
सच्चाई कमज़ोर बताते हो,
लूट पचाकर पले हुए
मोदी को चोर बताते हो ।

न्यायालय उच्चतम तुम्हारे
सारे भांडे फोड़ गया,
और तुम्हारी ठगी कथाओं
में इक पन्ना जोड़ गया ।

पांच साल में इक रफेल का
घोटाला ही पकड़ सके,
और इसी का मुद्दा लेकर
मोदी पर तुम अकड़ सके ।

न्यायालय ने दूध - दूध,
पानी का पानी कर डाला,
सौदा शुद्ध रफेल हुआ
शुचिता का सानी कर डाला ।

अब राहुल चुल्लू भर पानी
ले लो उसमें डूब मरो,
इक त्यागी को चोर बताया,
शर्म बची हो तो शर्म करो ।

बकते जाओ, मोदी को
शिकवा है नही बकैतों से,
भारत माँ का सच्चा सेवक
डरता नही डकैतों से ।

मैं लेखन की सच्चाई का
छोटा सा परवाना हूँ,
भाजप्पा का भक्त नही हूँ,
मोदी का दीवाना हूँ ।

ईमानों पर तंज कसोगे
कमर तुम्हारी तोड़ेगी,
मोदी को बदनाम करोगे,
कलम न तुमको छोड़ेगी ।

जिनकी रक्त धमनियों में ही
रक्त मिला है गोरों का,
वंश लुटेरों का है उनका,
पूरा कुनबा चोरों का ।
🚩 🚩 🚩 🚩 🚩 🚩
(मोदी पर विश्वास करने वाला हर व्यक्ति इस कविता का करोङो लोगों तक पहुचाने का काम करे, बिना कांट-छांट के)

Saturday, 8 October 2016

देश की सेना को अलग तरह से सैल्यूट

🚩नाज हमें है उन वीरों पर, जो मान बड़ा कर आये हैं।
दुश्मन को घुसकर के मारा, शान बड़ा कर आये हैं।I
🚩मोदी जी अब मान गये हम, छप्पन इंची सीना है।
कुचल, मसल दो उन सब को अब, चैन जिन्होंने छीना है।I
🚩और आस अब बड़ी वतन की, अरमान बड़ा कर आये हैं।
नाज हमें है उन वीरों पर, जो शान बड़ा कर आये हैं।I
🚩एक मरा तो सौ मारेंगे, अब रीत यही बन जाने दो।
लहू का बदला सिर्फ लहू है, अब गीत यही बन जाने दो।I
🚩गिन ले लाशें दुश्मन जाकर, शमसान बड़ा कर आये हैं।
नाज हमें है उन वीरों पर, जो मान बड़ा कर आये हैं।I
🚩अब बारी उन गद्दारों की, जो घर के होकर डसते हैं।
भारत की मिट्टी का खाते, मगर उसी पर हँसते हैं।I
🚩उनको भी चुन चुन मारेंगे, ऐलान बड़ा कर आये हैं।
नाज हमें है उन वीरों पर, जो मान बड़ा कर आये हैं
    👍   अजय यादव                                【ABVP Member】        परमेश्वर सिंह मेमोरियल पी0जी0कॉलेज,आनन्दनगर,महराजगंज,उ0प्र0🚩🚩भारत🚩🚩

1 रूपये में आप बना देंगे चीन से शाक्तिशाली भारतीय सेना

एक रूपये मात्र रोज का भुगतान वो भी भारतीय सेना के लिए। मोदी सरकार ने आज कैबनेट की मीटिंग में एक पूरे भारतीयो के लिए सेना की आधुनिकता और सेना के जवानो जो की युद्ध क्षत्र में घायल होते है या श्ाहीद होते है उनके लिए एक बैंक अकाउंट खोल ही दिया।जिसमे हर भारतीय अपने स्वक्षे से कितना भी दान दे सकता है। जो की 1 रुपए से शुरू होकर असीमित  है।

इस पैसे का प्रयोग सेना तथा अर्धसैनिक बलो के लिए हथियार खरदिना भी होगा । मन की बात तथा फेसबुक, ट्वीटर,व्हात्सप्प पर लोगो के सुझाव पर आज के जलते हालात पर मोदी सरकार ने अंततः फैसला लेते हुए नई दिल्ली, सिंडिकेट बैंक में आर्मी वेलफेयर फण्ड बैटल कैदुअल्टी फण्ड अकाउंट खोला है।

यह मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक है। जहाँ से भारत को सुपर पॉवर बनने से कोई नहीं रोक सकता। भारत की 1.30 करोड़ जनसंख्या में से अगर 70% भी केवल एक रुपया इस फण्ड में रोज़ डालते है तो वो 1 रुपये एक दिन में 100 करोड़ होगा। 30 दिन में 3000 करोड़ और 36000 करोड़ एक साल में। 36,000 करोड़ तो पाकिस्तान का सालाना रक्षा बजट भी नहीं है । हमलोग प्रतिदिन 100 या 1000 रुपया रोज़ फालतू के काम में खर्च कर देते है लेकिन यदि हमलोग एक रूपये सेना के लिए दिया तो सचमुच भारत एक सुपर पॉवर जरूर बनेगा।

आपका ये रुपया सीधे रक्षा मंत्रालय के सेना सहायता एवं वॉर कैसुअल्टी फण्ड में जमा होगा। जो सैन्य सामग्री और सेना के जवानो के काम आएगा

इसलिए मोदीजी के इस अभियान से जुड़कर सीधे तौर पर सेना की मदद करें। पाकिस्तान हाय हाय कर सड़क जाम करने और बयानबाजी करने से कुछ नहीं होगा। मोदी और देश की जनता की सोच को अमलीजामा पहनाये और अपने देश की सेना को मजबूत बनाये। जिससे पकिस्तान और चीन जैसे देशो को उसकी बिना किसी देश की सहायता से उनकी औकात बता सके। बैंक डिटेल्स निचे दिए गए है।
Bank Details:
SYNDICATE BANK
A/C NAME: ARMY WELFARE FUND BATTLE CASUALTIES
A/C NO: 90552010165915
IFSC CODE: SYNB0009055
SOUTH EXTENSION BRANCH,NEW DELHI.

इस सन्देश को सभी जगह फैला दे ताकि सभी 1.30 करोड़ भारतीयो को  अपने कर्तव्यों का पता चल जाये। सभी ग्रुप और पर्सनल no पर भी भेजें। जय हिन्द।ajay yadav        ajayy1510@gmail.com

Friday, 23 October 2015

भारत - चीन युद्ध के हीरो india china war 1962

आज तक पर जब रेजांगला के वीर अहीर की डाक्यूमेंट्री देख रह था तो पुरे एपिसोड में सिर्फ एक बार अहीर शब्द आया | इस तकलीफ और दर्द को हमें बारीक रूप में समझना होगा |कवीर बेदी एंकर थे ,जब वे बोले की प्रकृति दिक्कतों के बाद भी जिस तरह से एक बहादुर पलटन अहीर ने बहादुरी दिखाई ,उससे चीन के सैनिक भी हतप्रभ रह गए |विश्व इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ की किसी विरोधी सैनिक देश ने दुसरे देश के सैनिको  को इतना सम्मान दिया (चीनियों ने दिया था जब हमारे वीर अहीर शेरों की लाशों को चीनियों ने कम्बल से ढका और उनके सिर के साथ उनकी बन्दूक को खड़ा किया और एक कार्ड पर “बहादुर” लिख कर उनके सीने पर रख दिया और फिर रेडियो पीकिंग से खबर दी की चीन का सबसे ज्यादा नुक्सान रेजांगला में हुआ क्योंकि एक बहुत ही बहादुर कौम ने रेजांगला में मुकाबला किया था )|आप को कैसे यकीन दिलाये की यह एक सिहरन पैदा करने वाली स्थिति थी ,दुःख की बात है ,जिस कथा को पुरे विवरण को पूरी दिलेरी से दिखाना चहिये था ,उसे मात्र दो शब्दों में निपटा दिया गया |कुछ मिले श्रोतो को आप के सामने रख रहा हु ,आप इसे कॉपी पेस्ट के माध्यम से हर जगह फैलाये ..दुनिया का सैन्य इतिहास यूं तो वीरता की कहानियों से भरा पड़ा है, परंतु रेजांगला की गौरवगाथा हर लिहाज से शहादत की अनूठी दास्तां हैं। बिना किसी तैयारी के अहीरवाल के वीर जवानों ने आज ही के दिन 18 नवंबर 1962 को लद्दाख की दुर्गम बर्फीली चोटी पर शहादत का ऐसा इतिहास लिखा था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। यह यहां के वीरों के जज्बे का ही परिणाम था, जिसके चलते चीन सीज फायर के लिए मजबूर हो गयाथा। बेशक भारत को इस युद्ध में अधिकारिक रूप से जीत नसीब नहीं हुई, परंतु सामरिक दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाने वाली रेजांगला पोस्ट पर यहां के जांबाज जवानों ने हजारों चीनी सैनिकों को मार गिराया था। रेजांगला पोस्ट पर वर्ष 1962 की इस लड़ाई में तत्कालीन 13 कुमाऊं बटालियन के कुल 124 जवान शामिल थे, जिनमें से 114 शहीद हो गये थे। शहादत देने वालों में अधिकांश जवान अहीरवाल क्षेत्र के थे। कुर्बानी देने से पूर्व इन जवानों ने देश की सरहद की ओर बढ़ रहे चीन के 1300 जवानों को मौत के घाट उतार दिया था। इस युद्ध की खास बात यह थी कि चीनी सैनिक जहां पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों व बर्फीले मौसम से पूरी तरह अभ्यस्त थे, वहीं मैदानी क्षेत्रों से गये भारतीय सैनिकों के लिए परिस्थितियां पूरी तरह प्रतिकूल थी। हथियारों के मामले में भी भारतीय जवान चीन के सैनिकोंसे पीछे थे। विशेष बात यह भी थी कि चीन जहां पूरी तैयारी के साथ युद्ध मैदान में उतरा था, वहीं भारत-चीनी भाई-भाई के नारे के बीच भारत को सपने में भी चीनी आक्रमण का आभास नहीं था। रेजांगला पोस्ट पर लड़रहे वीरों के सामने परीक्षा की घड़ी 17 नवंबर की रात उस समय आई, जब तेज आंधी-तूफान के कारण रेजांगला की बर्फीली चोटी पर मेजर शैतान सिंह भाटी के नेतृत्व में मोर्चा संभाल रहे सी कंपनी से जुड़े इन 124 जवानों का संपर्क बटालियन मुख्यालय से टूट गया। ऐसी ही विषम परिस्थिति में 18 नवंबर को तड़के चार बजे युद्ध शुरू हो गया। नजदीक की दूसरी पहाडि़यों पर मोर्चो संभाल रहे अन्य सैनिकों को रेजांगलापोस्ट पर चल रहे इस ऐतिहासिक युद्ध की जानकारी तक नहीं थी। लद्दाख की बर्फीली, दुर्गम व 18 हजार फुट ऊंची इस पोस्ट पर सूर्योदय से पूर्व हुए इस युद्ध में यहां के वीरों की वीरता देखकर चीनी सेना कांप उठी। इस युद्ध में 124 में से कंपनी के 114 जवान शहीद हो गये, लेकिन उन्होंने चीन के आगे बढ़ने के मंसूबों पर पानी फेर दिया। पीकिंग रेडियो ने भी तब केवल रेजांगला पोस्ट पर ही चीनी सेना की शिकस्तस्वीकार की थी। रेजांगला पोस्ट पर दिखाई वीरता का सम्मान करते हुए भारत सरकार ने कंपनी कंमाडर मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार पदक परमवीर चक्र से अलंकृत किया था तथा इसी बटालियन के आठ अन्य जवानों को वीर चक्र, चार को सेना मैडल व एक को मैंशन इन डिस्पेच का सम्मान दिया था। इसके अलावा 13 कुमायूं के सीओ को एवीएसएम से अलंकृत किया गया था। भारतीय सेना के इतिहास में किसी एक बटालियन को एक साथ बहादुरी के इतने पदक अब तक कभी नहीं मिले। सरकार ने चार्ली कंपनी की वीरता को देखते हुए बाद में एक अहम निर्णय लेते हुए कंपनी का दोबारा गठन किया तथा इसका नाम रेजांगला रखा। रेजांगला युद्घ में शहीद हुए सैनिकों में मेजर शैतान सिंह पीवीसी जोधपुर के भाटी राजपूत थे, जबकि नर्सिग सहायक धर्मपाल सिंह दहिया (वीर चक्र) सोनीपत के जाट परिवार से थे। कंपनी का सफाई कर्मचारी पंजाब कारहने वाला था। इनके अलावा शेष सभी जवान अहीर जाति के थे। इनमें से भी अधिकांश हरियाणा के रेवाड़ी, महेन्द्रगढ़ व सीमा से सटे अलवर जिले के रहने वाले थे।ख़ास बात ये रही की जब गोलियां खत्म हो गई तो जवानों ने हथियारों का इस्तेमाल लाठियों के रूप में किया और रेजांगला पोस्ट पर दुश्मन का कब्जा होने नहीं दिया। हमारी आने आने वाली पीढि़यों को प्रेरणा मिले…जय यादव जय माधव

Wednesday, 30 September 2015

भारतीय नौसेना की नई ताकत

।भारतीय नौसेना के बेड़े में अब एक और ताकत जुड़ गई है। यह बड़ी ताकत भारत में ही बना युद्धपोत आईएनएस कोच्चि है जिसे नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया है। स्वदेश निर्मित सबसे बड़ा युद्धपोत आईएनएस कोच्चि बुधवार को भारतीय नौसेना में शामिल हो गया। रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने इसे नौसेना को समर्पित किया। आईएनएस कोच्चि को नौसेना में शामिल करने की घोषणा करते हुए पार्रिकर ने 7,500 टन वजनी और 30 नॉट की रफ्तार वाले इस युद्धपोत को 'विदेशी जहाजों जितना बेहतर' बताया।इस युद्धपोत का निर्माण मुंबई में मझगांव डॉक्स लिमिटेड ने किया है। यह कोलकाता श्रेणी (परियोजना 15ए) का दूसरा युद्धपोत है। इस पर 4,000 करोड़ रुपये की लागत आई है। कोलकाता श्रेणी (परियोजना 15ए) का पहला युद्धपोत आईएनएस कोलकाता को अगस्त 2014 में नौसेना में शामिल किया गया था, जबकि तीसरे और अंतिम आईएनएस चेन्नई युद्धपोत को साल 2016 के आखिर में नौसेना में शामिल किया जाना है।माना जाता है कि पिछले 11 सालों से बन रहा यह युद्धपोत कोलकाता सीरीज का सबसे ताकतवर युद्धपोत है। आईएनएस कोच्चि कोलकाता सीरीज का युद्धपोत है जिसकी नींव 2004 में यानि 11 साल पहले रखी गई थी आज वो पूरी तरह बनकर तैयार है।साल 2009 में इसे पहली बार परिक्षण के लिए समुद्र में उतारा गया था। इससे पहले कोलकाता सीरीज के तीन युद्धपोतों में से सबसे पहला युद्धपोत आईएनएस कोलकाता पिछले साल नौसेना में शामिल किया गया था। मैक इन इंडिया के नारे में आईएनएस कोच्ची एक जीताजागता मिसाल बन चुका है।पढ़ें खूबियांआईएनएस कोच्चि  164 मीटर लंबा और 18 मीटर चौड़ा है। इसकी ऊंचाई एक पांच मंजिला इमारत के बराबर है। इसका वजन 7400 टन का है। कोलकाता सीरीज का युद्धपोत आईएनएस कोच्चि में पहली बार थ्री डी रडार का इस्तेमाल किया गया है। हथियारों के मामले में INS कोच्चि में ब्रह्मोस मिसाइल, 76 एमएम गन, दो रॉकेट लॉन्चर, एंटी-सर्फेस गन, एंटी सबमरीन रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं। इतना ही नहीं इसमें सबमरीन डिटेक्टर और चार टॉरपीडो भी मौजूद हैं।आईएनएस कोच्चि को 2012 में नौसेना के बेड़े में शामिल करने की योजना थी लेकिन इसके निर्माण में देरी होने की वजह से इसे शामिल नहीं किया जा सका। मझगांव डॉक लिमिटेड ने इसके निर्माण का काम 2004 में शुरू कर दिया था। इस जंगी पोत में अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां भी लगाई गई हैं। जिनमें पनडुब्बी रोधी तकनीक भी शामिल है। इस युद्धपोत में सतह से सतह पर मार करने वाली अत्याधुनिक ब्रह्मोस मिसाइलें, रॉकेट लांचर, टॉरपीडो ट्यूब लॉन्चर, सोनार हमसा, ईडब्ल्यूएस एलोरा व एके-630 तोप भी मौजूद हैं। जो समुद्री हवाई हमले के दौरान दुश्मन के दांत खट्टे करने में पूरी तरह सक्षम है।विशिष्ट बनावट के कारण यह दुश्मनों के रडार को चकमा देने में पूरी तरह सक्षम है। नौसेना अधिकारियों के मुताबिक 164 मीटर लंबे और 18 मीटर चौड़ा यह पोत अपनी खास तकनीक की वजह से दुशमनों के रडारों पर किसी छोटी नौका जैसा दिखाई देगा। जिससे यह दुश्मन के काफी नजदीक पहुंचकर उसपर हमला कर सकता है।इस पर स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती भारत को दुनिया के उन चंद देशों की कतार में खड़ा कर देती हैं जो अपनी नौसेना के युद्धपोतों से 300 किलोमीटर तक निशाना साध सकते हैं। इसके अलावा इसमें लगी कम दूरी तक मार कर सकनेवाली मिसाइलें और अतिसंवेदनशील रडार भी इस पोत में चार चांद लगा देते हैं।आईएनएस कोच्चि में नौसेना के सेलर और अधिकारी के रहने के लिए भी खास बंदोबस्त किए गए हैं। इस युद्धपोत में लगभग 400 नौसेना के सेलर और अधिकारियों के रहने और उनके खान-पान की व्यवस्था की गई है।इस पोत में संयुक्त गैस और गैस प्रमोदन प्रणाली लगी हुई है। जिसमें चार शक्तिशाली रिवर्सिबल गैस टर्बाइन भी हैं। ये टर्बाइन 30 नॉट से भी ज्यादा गति हासिल कर सकते हैं। चार गैस टर्बाइन जनरेटरों और एक डीजल ऑल्टरनेटर से इस पोत को बिजली भी मिलेगी। ये सभी मिलकर 4.5 मोगावाट बिजली पैदा करते हैं जो एक छोटे शहर को रोशन करने में पूरी तरह सक्षम है। बिजली और इंजन पॉवर के लिए आईएनएस कोच्ची में MCR यानि मशीनरी कंट्रोल रूम बनाया गया है। किसी भी जंगी जहाज में मशीनरी कंट्रोल रूम की काफी अहम भूमिका रहती है। ibn

Friday, 17 July 2015

परमाणु विमानवाहक पोत भारत बनायेगा

।नौसेना की ताकत बढ़ाने तथा उसे अत्याधुनिक बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए भारत दस अरब डॉलर की लागत से अमरीका की तर्ज पर परमाणु इंजन से चलने वाला विमानवाहक पोत बनाएगा।नौसेना के सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत देश के पहले परमाणु इंजन संचालित विमानवाहक पोत को बनाने के लिए नौ भारतीय शिपयार्डों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। इस पोत को आईएसी-2 नाम दिया गया है और यह 65000 टन श्रेणी का होगा।इसका फ्लाइट डेक 'केटापुल्ट टेक ऑफ' प्रणाली से लैस होगा। इस प्रणाली में उड़ान भरने के लिए विमान को रनवे पर गुलेल की तरह धक्का मारकर छोड़ा जाता है। इस प्रणाली का इस्तेमाल अमरीका में आम तौर पर किया जाता है।भारतीय शिपयार्डों से प्रस्ताव मांगेसूत्रों ने बताया, 'नौ भारतीय शिपयार्डों से इस परियोजना के तहत प्रस्ताव मांगे गए हैं और उन्हें 21 जुलाई तक ये प्रस्ताव देने हैं।'नौसेना ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है जो इन शिपयार्डों की निर्माण क्षमता का अध्ययन करेगा। इस समिति को सितम्बर के अंत तक रिपोर्ट देने को कहा गया है।सूत्रों के अनुसार, समिति की अध्यक्षता रियर एडमिरल सुरेन्द्र आहूजा करेंगे, जो संयोग से आईएसी-2 के लिए गठित अध्ययन समूह के भी अध्यक्ष थे। इस परियोजना के लिए पांचों सरकारी शिपयार्डों एमडीएल, जीआरएसई, जीएसएल, सीएसएल और एचएसएल तथा चार निजी शिपयार्डों एल एंड टी, पिपावा, एबीजी शिपयार्ड और भारती शिपयार्ड से प्रस्ताव मांगे गए हैं।आईएसी-2 होगा सबसे बड़ा युद्धपोतयह मोदी सरकार की मेक इन इंडिया योजना के तहत सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक होगी। आईएसी-2 भारतीय नौसेना के बेड़े का सबसे बड़ा युद्धपोत होगा। अभी नौसेना के पास दो विमानवाहक पोत आईएनएस विराट और आईएनएस विक्रमादित्य हैं।इसके अलावा पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के समुद्री परीक्षण किए जा रहे हैं। आईएनएस विराट पर विमानों के उड़ान भरने के लिए सटोवल तथा विक्रमादित्य पर उड़ान भरने के लिए स्काई जंप तथा उतरने के लिए एरेस्टेड रिकवरी प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस प्रणाली को सटोबर कहा जाता है।

Wednesday, 10 June 2015

सेना ने पहली बार दूसरे देश में घुसकर आतंकियो को मारा

. मणिपुर के चंदेल जिले में बीते
चार जून को सेना पर हमला करके 18 जवानों की जान
लेने वाले उग्रवादियों को मार गिराया गया है। भारतीय सेना
ने म्यांमार में जाकर उग्रवादियों के खिलाफ चुनिंदा ठिकानों पर कार्रवाई
की है। सेना ने मंगलवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस
बात की जानकारी दी। रिपोर्ट्स
के मुताबिक, केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद
म्यांमार को साथ लेकर उग्रवादियों के खात्मे का ऑपरेशन चलाया गया
और 15 उग्रवादियों को मार गिराया गया। सेना ने कहा कि देश
की एकता और अखंडता के लिए खतरा बने
किसी संगठन से निपटने के लिए हम तैयार हैं।
सीमा पार जाकर उग्रवादियों को ढेर किया
सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल रणधीर सिंह ने कहा कि
इंटेलिजेंस से मिले इनपुट के आधार पर उग्रवादी भारत
में हमले की बड़ी साजिश रच रहे थे। इंडो-
म्यांमार बार्डर पर छिपे उग्रवादियों के खात्मे के लिए हमने म्यांमार
सरकार से बात की। इसके बाद सीमा पार
जाकर नागालैंड और मणिपुर सीमा पर दो अलग-अलग
ठिकानों पर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। हमला करने वाले
उग्रवादियों के 2 ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा
कि पड़ोसी देश की सेना के साथ हमारे
अच्छे संबंध है, भविष्य में भी आतंकवाद से लड़ने के
लिए मदद ली जाएगी।
म्यांमार में ही क्यों हुई कार्रवाई?
म्यांमार से सटी भारत की सीमा
1643 किलोमीटर लंबी है। दोनों
सीमाओं के बीच आज तक फेंसिंग
नहीं हुई। दोनों देशों के सुरक्षा बल अपने इलाकों में 16
किलोमीटर अंदर तक आजादी से
आवाजाही करने की इजाजत देते हैं।
यही वजह है कि 4 जून को उग्रवादी
मणिपुर में हमला करने के बाद म्यांमार की तरफ भाग
निकले। पूर्वोत्तरी राज्यों में कम से कम 24
उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं। इनमें से अधिकतर के
ट्रेनिंग कैम्प म्यांमार और भूटान में हैं।
अपनी सरहद से बाहर हमारी सेना ने
कब चलाए ऑपरेशन?
- 1971 : पाकिस्तान से जंग के दौरान हमारी सेना
बांग्लादेश में घुसी और उसे आजाद कराया।
- 1987 : लिट्टे को बेअसर करने के लिए भारत ने अपने शांति रक्षा
बलों के 50 हजार जवानों को श्रीलंका के जाफना में
उतारा। हमारी सेना के 1200 जवान शहीद
हुए। अभियान 1990 तक चला।
- 1988 : तख्तापलट की कोशिशें नाकाम करने के लिए
मालदीव ने भारत से मदद मांगी। भारत ने
सेना के 1400 कमांडो माले में उतारे। विद्रोहियों का बड़े पैमाने पर
सफाया किया।
- 1995 : पूर्वोत्तर के उग्रवादियों के कैम्प नष्ट करने के लिए
सेना ने म्यांमार में प्रवेश किया। यह ऑपरेशन गोल्डन बर्ड
कहलाया। 40 उग्रवादियों को मार गिराया गया।
पड़ोसी देशों से कितनी मिली
है भारत को मदद?
- म्यांमार : म्यांमार ने इससे पहले 1995 में भारतीय
सेना के साथ ऑपेशन गोल्डन बर्ड चलाया था। इसके बाद 2001 में
उसने भारत के कहने पर फिर ऑपरेशन चलाया। 200 उग्रवादियों
को गिरफ्तार किया और 1500 हथियार बरामद किए।
- भूटान : रॉयल भूटान आर्मी ने 2003 में उल्फा,
एनडीएफबी और केएलओ उग्रवादियों के
खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। 150 उग्रवादी मार गिराए।
3000 उग्रवादियों को अपनी सीमाओं से
बाहर खदेड़ दिया। उल्फा के 14, बोडो के 11 और केएलओ के 4
कैम्प नष्ट कर दिए। भूटान समय-समय पर पूर्वोत्तर के
उग्रवादियों के खिलाफ अभियान चलाता है।
- बांग्लादेश : पूर्वी नगालैंड के उग्रवादियों के खिलाफ
बांग्लादेशी सेना कार्रवाई करती है। भारत
समर्थित शेख हसीना के प्रधानमंत्री होने
के चलते बांग्लादेश पूर्वोत्तर के उग्रवादी तत्वों को
पनाह नहीं देता।
- श्रीलंका : हाल के वर्षों में सैन्य रिश्ते बिगड़े हैं।
श्रीलंकाई सेना हमारे मछुआरों पर फायरिंग
करती रहती है। दक्षिण भारत में
अमेरिकी दूतावासों पर हमले की साजिश रच
रहा आईएसआई का एक एजेंट कोलंबो स्थित
पाकिस्तानी दूतावास में पिछले साल काम करता पाया गया।
भारतीय खुफिया एजेंसी और सरकार के
दबाव में श्रीलंका ने आईएसआई अफसर को पाकिस्तान
भेज दिया।
- पाकिस्तान : भारत के खिलाफ आतंक फैलाने के मामले में सबसे
आगे। आतंकियों के खिलाफ भारत की कभी
मदद नहीं की।
- चीन : अक्साई चीन में मौजूद पाकिस्तान
समर्थित आतंकियों पर कभी कार्रवाई नहीं
की। पूर्वोत्तर के उग्रवादियों को भी हथियार
मुहैया कराने का आरोप है।
उग्रवादियों ने किया था 33 साल का सबसे खतरनाक हमला
उग्रवादियों का यह हमला बीते 33 साल में मणिपुर में
सेना पर हुआ सबसे खतरनाक था। इससे पहले, 1982 में राज्य
में इसी तरह के हमले में 20 जवान
शहीद हुए थे। उस वक्त उग्रवाद चरम पर था। यह
भी पहली बार हुआ था कि उग्रवादियों ने
आरपीजी यानी रॉकेट लॉन्चर्स
का इस्तेमाल किया। नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड
(खपलांग) ने हमले की जिम्मेदारी
ली थी। यह संगठन नगा समुदाय
की ज्यादा आबादी वाले
पूर्वोत्तरी राज्यों को मिलाकर ग्रेटर नगालैंड बनाना चाहता
है। इस संगठन के साथ करीब 2000
उग्रवादी जुड़े हैं। मणिपुर के चंदेल सहित
पहाड़ी इलाकों में भी इस संगठन
की पैठ है। इसकी केंद्र सरकार के साथ
शांति वार्ता विफल हो चुकी है।