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Wednesday, 15 August 2018

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

आप सभी लोगों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं





💐जलती रही चिताएँ फिर सभी मौन थें । हमें पढ़ाया जाता है कि आजादी चरखे से आईं। फिर फाँसी पर झूलने वाले नौजवान कौन थें।💐

Tuesday, 18 July 2017

चीन ने की भारत से युद्ध की पूरी तैयारी बायकॉट china प्रोडक्ट China only indian

क्या आप अब भी चाइना प्रोडक्ट यूज करेंगें भारत के खिलाफ चीन की मजबूती में
भाई मैंने तो Made in China and made in PRC  बहिष्कार कर दिया अपना mi का सेट के स्थान पर intex. का सेट ले लिया
अब आप की बारी आज ही कसम खाइये बायकॉट चाइना प्रोडेक्ट डिलेट uc ब्राउज़र
 जय हिंद
    
   सिक्किम क्षेत्र में भारत-चीन के बीच सीमा विवाद का मुद्दे पर तनानती कम होने का नाम नहीं ले रही है। बॉर्डर पर चल रहा भारत और चीन के बीच तनाव का असर दोनों देशों के संबंधों पर दिख रहा है। भारतीय सेना चीन से लगती सीमा के पास डोकलाम इलाके में लंबे समय तक बने रहने की तैयारी कर चुकी है। चीन वहां से भारतीय सैनिकों को वापस बुलाने की मांग कर रहा है।

डोकलाम में जारी तनाव के बीच पिछले लगभग 1 महीने से भारत के 350 से अधिक जवान एक मानव श्रृंखला बना कर चीन के सैनिकों का सामना कर रहे हैं। दोनों देशों की सेनाओं के बीच कुछ ही मीटर का फासला है। नाथुल दर्रे से 15 किमी की दूरी पर दोनों सेनाएं 500 मीटर पर जमी हुई हैं। 6 जून से भारत, भूटान और सिक्किम के तीन बिंदु स्थल (चिकननेक) पर तनाव बरकरार है। भारत मामले का हल निकालने के लिए सभी विकल्पों को आजमा रहा है।

असल में 6 जून से शुरू हुए इस टकराव के बाद से ही नई दिल्ली और बीजिंग में बातचीत जारी है, लेकिन ग्राउंड जीरो पर नजारा बिल्कुल अलग है। अंग्रेजी वेबसाइट एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, बॉर्डर पर तो दोनों देशों के कुछ ही सैनिक आमने-सामने हैं लेकिन भारतीय सेना ने जो ड्रोन से देखा है उससे साफ दिखता है कि कुछ ही दूरी पर चीन ने लगभग 3000 से ज्यादा सैनिक खड़े किए हुए हैं। जो कि हथियारों के साथ तैयार हैं। वहीं भारत ने भी इसके जवाब में पुख्ता तैयारी की है और अपने सैनिक भी खड़े किए हैं।

समुद्र तल से लगभग 4500 मीटर ऊंचे इस दुर्गम स्थल पर हवा में ऑक्सीजन का लेवल बहुत कम होता है। जिस वजह से मानव श्रृंखला में तैनात जवानों को हर दो घंटे में बदलकर उनके जगह नए जवान तैनात किए जा रहे हैं।

चीन लगातार ढोक ला इलाके में अपनी नजर बनाए हुए है। अगर चीन इस इलाके में अपनी पैठ मजबूत कर लेता है, तो यह भारत के लिए काफी मुश्किल हो जाएगा। भारत अपने नॉर्थ ईस्ट इलाके से संबंध भी मुश्किल में पड़ेगा। इसका ही असर है कि सिक्किम के बाद अब बंगाल ने भी यह कहना शुरू कर दिया है कि चीन उनके इलाके में दखल दे रहा है।

ममता बनर्जी का कहना है कि अगर सिक्किम पर चीन का कब्जा होता है तो दार्जिलिंग और चीन में ना के बराबर ही अंतर होगा जो कि खतरे की घंटी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन की गतिविधियां बढ़ने की बात कहते हुए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है। उन्होंने इस मसले पर राजनाथ से टेलीफोन पर भी बातचीत की है।

राज्य सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृहमंत्री को पिछले हफ्ते पत्र लिखा गया है, जिसमें कहा गया है कि दार्जिलिंग में गोरखालैंड की मांग को लेकर चल रहे हिंसक आंदोलन के पीछे भी चीन की ही अति सक्रियता है। सोमवार को ममता ने राज्य विधानसभा में राष्ट्रपति चुनाव के मतदान के बाद संवाददाता सम्मेलन में पश्चिम बंगाल की पूर्वोत्तर सीमाओं में व्याप्त अशांति एवं दार्जिलिंग में जारी हिंसक आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि इसे चीन की शह मिल रही है।

चीनी सरकार का मुखपत्र कहे जाने वाले 'ग्लोबल टाइम्स' ने धमकी भरे लहजे में लिखा है कि चीन टकराव के लिए तैयार है और डोकलाम के मुद्दे चीन युद्ध के लिए जाने से भी पीछे नहीं हटेगा अगर ऐसा हुआ तो भारत को यह टकराव भुगतना पड़ सकता है।

ग्‍लोबल टाइम्‍स ने भारत पर आरोप लगाते हुए यह भी कहा है कि 16 जून को भारतीय सेना ने सिक्किम सेक्‍टर में सीमा पार करते हुए चीनी क्षेत्र में प्रवेश किया। ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, 'भारत की यह कार्रवाई प्रत्यक्ष तौर पर चीनी संप्रभुता पर अतिक्रमण है। चीन को डोकलाम में बिना किसी झिझक के साथ अपने निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अपने सैनिकों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी करनी चाहिए। चीन को आगे बढ़कर लाइन ऑफ कंट्रोल (एलएसी) पर टकराव का मुकाबला करना चाहिए, भारत अगर कई जगहों से मुश्किलों का सामना कर रहा है तो उसे एलएसी पर भी टकराव का सामना करना होगा। चीन एक संप्रभु देश है और वह भारत के साथ किसी भी तरह के टकराव होने से नहीं डरता है और न ही किसी भी तरह के युद्ध से डरता है और खुद को इसके लिए तैयार करता है।'

Monday, 3 July 2017

इस्राइल ने भारत के लिए जो किया दुनिया में किसी देश ने सोचा तक नही होगा , ilove you israil

मोदी जी कल यानी 4 से 6 जुलाई को इस्राइल जा रहे हैं इस्राइल यानी कि छोटा भूकंप
इस्राइल अपने देश भारत के उत्तर प्रदेश से भी छोटा है मगर पूरी अरब कंट्री उससे भय खाती है 22 मुस्लिम अरब देशों से 7 साल तक अकेले लड़ता रहा
वहां आज आजाद भारत में पहली बार कोई भारतीय प्रधान मंत्री जा रहा है क्यों
जानते है राजनीति के कारण वोटबैंक के कारण जाने से डरते थे
वहां एक हप्ते से मोदी जी की स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं वहां के पीएम तथा न्यूज़  ने यहां तक कह दिया कि दुनिया के सबसे ताकतवर एवं बड़े नेता भारत आ रहें उनसे हमे बड़ी उम्मीदें है देखिये मोदी जी के लिए इस्राइल की दीवानगी जानिए भारत के लिए सबकुछ करने वाले इस्राइल के बारे में

भारत का सबसे सच्चा दोस्त अगर है तो वो है इस्राइल
इस्राइल की स्वतंत्रता के समय भारत ने इस्राइल को मान्यता नहीं दी
संयुक्त राष्ट्र में भारत फलीस्तीन के मुद्दे पर इस्राइल के खिलाफ हमेशा रहा है तथा संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल भारत के साथ
1992 में जाकर भारत तथा इस्राइल के बीच कूटनीतिक सम्बन्ध स्थापित हुए फिर भी इस्राइल के सहयोग से ही हम 1962 में चीन से  टक्कर ले सके थे

1965 में इस्राइल ने हमें चोरी छिपे हथियार दिये थे पाक से जंग के लिए
मगर सबसे बड़ी दोस्ती इस्राइल ने तब निभाई जब 1971 भारत -पाक युद्ध में उसका सबसे खास सहयोगी अमेरिका भारत को तबाह करने के लिए तथा पाक के समर्थन के लिए अपनी पूरी 7वी नोसेना बेड़ा भेज दिया था भारत से कूटनीतिक सम्बन्ध ना होते हुए भी  भारत के लिए अपनी हथियारों की तिजोरी खोल दी थी और जरूरत की हथियार भारत को दी थी

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इजरायल, भारत का मित्र देश रहा है। 1962 में भारत-चीन युद्ध, 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध के समय इजरायल ने भारत को आधुनिक सैन्य तकनीक मुहैया कराई
।प्लीज़ दोस्तों मेरा यूट्यूब चैनल लाइक और सब्सक्राइब करें
1999 के करगिल युद्ध में  एक सैन्य जासूसी उपग्रह लीज पर देने के साथ भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ को दो जासूसी विमान भी बेचे।

1999 कारगिल युद्ध में भारत जब अपने बोफोर्स तोपों से गोले बरसा रहा था तो हमारी गोलों की स्टोर खत्म होने को हुई उस समय हमारा सहयोगी रूस भी कम ना आया क्योंकि हम परमाणु परीक्षण के कारण अमेरिका चीन आदि देशों का प्रतिबंध झेल रहे थें सो रूस अमेरिका के दबाव में हमे गोले नहीं दिए
हमें  टैंक के गोले बनाने की तकनीक नहीं थी
उस समय सिर्फ इस्राइल ने ही हमे अपने स्टोर से गोले की सप्लाई की थी  आज
हमे बराक 8 की टेक्नोलॉजी , ड्रोन , रडार आदि की सप्लाई तथा टेक्नोलॉजी दे रहा  है
दोस्तों अगर आपको यह लेख अच्छ लगे तो इसका लिंक  शेयर जरूर कीजिये गा व्हाट्सएप , फेसबुक आदि पे जय हिंद
अगर आप हमसे कुछ कहना चाहते हैं तो 

Tuesday, 2 May 2017

कटा जब शीश सैनिक का तो (लवली कविता)

*Lovely poem.*

कहाँ पर बोलना है और कहाँ पर बोल जाते हैं।
जहाँ खामोश रहना है वहाँ मुँह खोल जाते हैं।।

कटा जब शीश सैनिक का तो हम खामोश रहते हैं।
कटा एक सीन पिक्चर का तो सारे बोल जाते हैं।।

नयी नस्लों के ये बच्चे जमाने भर की सुनते हैं।
मगर माँ बाप कुछ बोले तो बच्चे बोल जाते हैं।।

बहुत ऊँची दुकानों में कटाते जेब सब अपनी।
मगर मज़दूर माँगेगा तो सिक्के बोल जाते हैं।।

अगर मखमल करे गलती तो कोई कुछ नहीँ कहता।
फटी चादर की गलती हो तो सारे बोल जाते हैं।।

हवाओं की तबाही को सभी चुपचाप सहते हैं।
च़रागों से हुई गलती तो सारे बोल जाते हैं।।

बनाते फिरते हैं रिश्ते जमाने भर से अक्सर।
मगर जब घर में हो जरूरत तो रिश्ते भूल जाते हैं।।

Thursday, 26 January 2017

Happy Republic day

हम इण्डिया, हम है भारत, हम है हिन्दुस्तान से,*

रविन्द्र नाथ को नमन हमारा,आदर और सम्मान से

हिन्दी, तमिल, बंगाली में, लिखे है कई गान,

रविन्द्र जी रिणी है भारत, लेकर राष्ट्रगान।

राष्ट्रगान है शान हमारी, भारत की मर्यादा है,

लज्जित न होगा कभी तिरंगा, हम वीरों का ये वादा है।।*

जय भारत            जय हिंद           जय भारत


Monday, 26 December 2016

हिंदू सम्राट महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-

मोदी सरकार ने हमें गर्व से भर दिया यह स्मारक दुनिया में सबसे ऊंचा होगा जिसकी ऊंचाई 192 मीटर होगी. इस स्मारक की लागत करीब 3,600 करो


ड़ रुपये आंकी गई है.
महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-

1... महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोड़े समेत दुश्मन सैनिक को काट डालते थे।

2.... जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे ।  तब उन्होने अपनी माँ से पूछा कि- हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर आए ? तब माँ का जवाब मिला- ”उस महान देश की वीर भूमि हल्दी घाटी से एक मुट्ठी धूल लेकर आना,  जहाँ का राजा अपनी प्रजा के प्रति इतना वफ़ादार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले अपनी मातृभूमि को चुना ।”
लेकिन बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया था |
“बुक ऑफ़ प्रेसिडेंट यु एस ए ‘ किताब में आप यह बात पढ़ सकते हैं |

3.... महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलोग्राम था और कवच का वजन भी 80 किलोग्राम ही था|
कवच, भाला, ढाल, और हाथ में तलवार का वजन मिलाएं तो कुल वजन 207 किलो था।

4.... आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं |

5.... अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है, तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे,  पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी|
लेकिन महाराणा प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया |

6.... हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और अकबर की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए |

7.... महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुआ है,  जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है |

8.... महाराणा प्रताप ने जब महलों का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगों ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा कि फौज के लिए तलवारें बनाईं | इसी
समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गाढ़िया लोहार कहा जाता है|
मैं नमन करता हूँ ऐसे लोगो को |

9.... हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में तलवारें पाई गई।
आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 में हल्दी घाटी में मिला था |

10..... महाराणा प्रताप को शस्त्रास्त्र की शिक्षा "श्री जैमल मेड़तिया जी" ने दी थी,  जो 8000 राजपूत वीरों को लेकर 60000 मुसलमानों से लड़े थे। उस युद्ध में 48000 मारे गए थे । जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे |

11.... महाराणा के देहांत पर अकबर भी रो पड़ा था |

12.... मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में
अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था । वो महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा बिना भेदभाव के उन के साथ रहते थे ।
आज भी मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत हैं, तो दूसरी तरफ भील |

13..... महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक महाराणा को 26 फीट का दरिया पार करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ | उसकी एक टांग टूटने के बाद भी वह दरिया पार कर गया। जहाँ वो घायल हुआ वहां आज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है, जहाँ पर चेतक की मृत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर है |

14..... राणा का घोड़ा चेतक भी बहुत ताकतवर था उसके
मुँह के आगे दुश्मन के हाथियों को भ्रमित करने के लिए हाथी की सूंड लगाई जाती थी । यह हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे|

15..... मरने से पहले महाराणा प्रताप ने अपना खोया हुआ 85 % मेवाड फिर से जीत लिया था । सोने चांदी और महलो को छोड़कर वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में
घूमे ।

16.... महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और लम्बाई 7’5” थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे हाथ में।

महाराणा प्रताप के हाथी
की कहानी:

मित्रो, आप सब ने महाराणा
प्रताप के घोड़े चेतक के बारे
में तो सुना ही होगा,
लेकिन उनका एक हाथी
भी था। जिसका नाम था रामप्रसाद। उसके बारे में आपको कुछ बाते बताता हुँ।

रामप्रसाद हाथी का उल्लेख
अल- बदायुनी, जो मुगलों
की ओर से हल्दीघाटी के
युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है।

वो लिखता है की- जब महाराणा प्रताप पर अकबर ने चढाई की थी,  तब उसने दो चीजो को ही बंदी बनाने की मांग की थी ।
एक तो खुद महाराणा
और दूसरा उनका हाथी
रामप्रसाद।

आगे अल बदायुनी लिखता है
की-  वो हाथी इतना समझदार व ताकतवर था की उसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया था ।

वो आगे लिखता है कि-
उस हाथी को पकड़ने के लिए
हमने 7 बड़े हाथियों का एक
चक्रव्यूह बनाया और उन पर
14 महावतो को बिठाया,  तब कहीं जाकर उसे बंदी बना पाये।

अब सुनिए एक भारतीय
जानवर की स्वामी भक्ति।

उस हाथी को अकबर के समक्ष पेश किया गया ।
जहा अकबर ने उसका नाम पीरप्रसाद रखा।

रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने
और पानी दिया।

पर उस स्वामिभक्त हाथी ने
18 दिन तक मुगलों का न
तो दाना खाया और न ही
पानी पिया और वो शहीद
हो गया।

तब अकबर ने कहा था कि-
जिसके हाथी को मैं अपने सामने नहीं झुका पाया,
उस महाराणा प्रताप को क्या झुका पाउँगा.?

इसलिए मित्रो हमेशा अपने
भारतीय होने पे गर्व करो।

पढ़कर सीना चौड़ा हुआ हो ब्लॉग को
तो शेयर कर देना।

Saturday, 8 October 2016

देश की सेना को अलग तरह से सैल्यूट

🚩नाज हमें है उन वीरों पर, जो मान बड़ा कर आये हैं।
दुश्मन को घुसकर के मारा, शान बड़ा कर आये हैं।I
🚩मोदी जी अब मान गये हम, छप्पन इंची सीना है।
कुचल, मसल दो उन सब को अब, चैन जिन्होंने छीना है।I
🚩और आस अब बड़ी वतन की, अरमान बड़ा कर आये हैं।
नाज हमें है उन वीरों पर, जो शान बड़ा कर आये हैं।I
🚩एक मरा तो सौ मारेंगे, अब रीत यही बन जाने दो।
लहू का बदला सिर्फ लहू है, अब गीत यही बन जाने दो।I
🚩गिन ले लाशें दुश्मन जाकर, शमसान बड़ा कर आये हैं।
नाज हमें है उन वीरों पर, जो मान बड़ा कर आये हैं।I
🚩अब बारी उन गद्दारों की, जो घर के होकर डसते हैं।
भारत की मिट्टी का खाते, मगर उसी पर हँसते हैं।I
🚩उनको भी चुन चुन मारेंगे, ऐलान बड़ा कर आये हैं।
नाज हमें है उन वीरों पर, जो मान बड़ा कर आये हैं
    👍   अजय यादव                                【ABVP Member】        परमेश्वर सिंह मेमोरियल पी0जी0कॉलेज,आनन्दनगर,महराजगंज,उ0प्र0🚩🚩भारत🚩🚩

1 रूपये में आप बना देंगे चीन से शाक्तिशाली भारतीय सेना

एक रूपये मात्र रोज का भुगतान वो भी भारतीय सेना के लिए। मोदी सरकार ने आज कैबनेट की मीटिंग में एक पूरे भारतीयो के लिए सेना की आधुनिकता और सेना के जवानो जो की युद्ध क्षत्र में घायल होते है या श्ाहीद होते है उनके लिए एक बैंक अकाउंट खोल ही दिया।जिसमे हर भारतीय अपने स्वक्षे से कितना भी दान दे सकता है। जो की 1 रुपए से शुरू होकर असीमित  है।

इस पैसे का प्रयोग सेना तथा अर्धसैनिक बलो के लिए हथियार खरदिना भी होगा । मन की बात तथा फेसबुक, ट्वीटर,व्हात्सप्प पर लोगो के सुझाव पर आज के जलते हालात पर मोदी सरकार ने अंततः फैसला लेते हुए नई दिल्ली, सिंडिकेट बैंक में आर्मी वेलफेयर फण्ड बैटल कैदुअल्टी फण्ड अकाउंट खोला है।

यह मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक है। जहाँ से भारत को सुपर पॉवर बनने से कोई नहीं रोक सकता। भारत की 1.30 करोड़ जनसंख्या में से अगर 70% भी केवल एक रुपया इस फण्ड में रोज़ डालते है तो वो 1 रुपये एक दिन में 100 करोड़ होगा। 30 दिन में 3000 करोड़ और 36000 करोड़ एक साल में। 36,000 करोड़ तो पाकिस्तान का सालाना रक्षा बजट भी नहीं है । हमलोग प्रतिदिन 100 या 1000 रुपया रोज़ फालतू के काम में खर्च कर देते है लेकिन यदि हमलोग एक रूपये सेना के लिए दिया तो सचमुच भारत एक सुपर पॉवर जरूर बनेगा।

आपका ये रुपया सीधे रक्षा मंत्रालय के सेना सहायता एवं वॉर कैसुअल्टी फण्ड में जमा होगा। जो सैन्य सामग्री और सेना के जवानो के काम आएगा

इसलिए मोदीजी के इस अभियान से जुड़कर सीधे तौर पर सेना की मदद करें। पाकिस्तान हाय हाय कर सड़क जाम करने और बयानबाजी करने से कुछ नहीं होगा। मोदी और देश की जनता की सोच को अमलीजामा पहनाये और अपने देश की सेना को मजबूत बनाये। जिससे पकिस्तान और चीन जैसे देशो को उसकी बिना किसी देश की सहायता से उनकी औकात बता सके। बैंक डिटेल्स निचे दिए गए है।
Bank Details:
SYNDICATE BANK
A/C NAME: ARMY WELFARE FUND BATTLE CASUALTIES
A/C NO: 90552010165915
IFSC CODE: SYNB0009055
SOUTH EXTENSION BRANCH,NEW DELHI.

इस सन्देश को सभी जगह फैला दे ताकि सभी 1.30 करोड़ भारतीयो को  अपने कर्तव्यों का पता चल जाये। सभी ग्रुप और पर्सनल no पर भी भेजें। जय हिन्द।ajay yadav        ajayy1510@gmail.com

Monday, 18 April 2016

क्यों कर रहे है सेना को बदनाम

अभी कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक खबर वाइरल हो रही थी. खबर थी आर्मी के जवानों द्वारा छेड़छाड़ की. बहुत से मित्र संघ आलोचक और मोदी के विरोध करने वाले लोग उस खबर को अपनी वाल पर साझा कर रहे थे ज्यादतर लोग पढ़े लिखे समझदार लोग थे. खबर थी सेना के जवानों के द्वारा कथित तौर पर एक लड़की से छेड़छाड़ की. इस खबर से स्थानीय लोगों की नाराजगी की वजह से विरोध प्रदर्शन हुए, उसमें तीन लोगों की मौतें भी हुईं. सेना के जवानों द्वारा कथित तौर पर एक छात्रा के साथ छेड़ छाड़ के विरोध में ये इस प्रदर्शन का आयोजन हंदवाड़ा में  हुआ था. इसमें पहले पत्थरबाजी हुई और फिर भीड़ को काबू करने के लिए सेना को फायरिंग करनी पड़ी. इस बीच उस लड़की का वीडियो भी सामने आया है जिसमे उसने इस तरह की घटना से इंकार किया है.
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खैर कुपवाड़ा में हुई फायरिंग की राज्य सरकार और सेना दोनों ही अपने अपने स्तर पर जांच कर रही है उम्मीद है दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा. लेकिन ये घटना कहीं न कहीं भारतीय सेना के मनोबल को तोड़ती है. विश्व में हमारी साख को कमजोर करती है. आज जब युद्ध सिर्फ रणक्षेत्र में ही नहीं लडे जाते राजनैतिक रूप से कूटनीतिज्ञ युद्ध भी होता है और प्रचार प्रसार के माध्यम से प्रोपगेंडा फैला कर भी आपको हराने की कोशिश की जाती है. कश्मीर का मसला भी कुछ ऐसा है जहां पाकिस्तान छल बल सभी का प्रयोग कर रहा है और ये कोई नई बात नहीं है. सेना के लिए भी इस क्षेत्र में काम करना तलवार की धार पर चलने जैसा है. कहीं भी थोड़ी सी भी चूक बहुत महंगी पड़ सकती है. भारतीय सेना वहां दिन रात सीमाओ की रक्षा अपनी जान पर खेलकर कर रही है, इसमें कोई दो राय नहीं है.

लेकिन सेना का एक दूसरा पक्ष भी है जिसके बारे में बहुत कम लिखा पढ़ा जाता है, वो है उसका मानवीय चेहरा. जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ के दिनों में अपनी एक रिपोर्ट के दौरान बहुत बहुत से सैन्य अफसरों और जवानों को से मिलने जुलने का मौका मिला. आमतौर पर जैसा की फिल्मों से छवि बनती है गुस्सैल उम्रदराज़ और जाने क्या क्या. लेकिन भारतीय सेना की छवि इससे बिलकुल विपरीत है. शायद वहां की परिस्थितियों के हिसाब से जवानों और अफसरों को वहां तैनात किया हुआ है. ज्यादातर बहुत नेक मददगार इंसानियत से लबरेज़ गबरू युवक हैं. पंजाब हरियाणा उत्तराखंड के बहुत से जवानों से मिलने का मौका मिला जिन्होंने बाढ़ के दिनों में कश्मीर की अवाम की सेवा में अपना दिन रात एक कर दिया था. चारों तरफ कीचड भयंकर बदबू सडांध मारते शव और उन सब के बीच लेफ्टिनेंट और कर्नल रैंक के युवा अधिकारी फावड़ा उठाये न सिर्फ काम कर रहे थे बल्कि स्थानीय लोगों का भी उत्साह बढ़ा रहे थे.

जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ के वक्त रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी रही सेना
सेना की ज़िंदगी चुनौतियों के साथ शानदार ज़िंदादिल तरीके से जीने का दूसरा नाम है. ना सिर्फ सैन्य अधिकारी बल्कि इनकी पत्नियों और अन्य परिवार के लोगों ने श्रीनगर में जगह जगह इनके लिए खाने पीने की व्यवस्था की. क्योंकि केंद्र की मदद मिलने में अभी भी कुछ वक़्त लगता और उमर अब्दुल्ला सरकार अभी भी उसपर राजनीति की रोटियां सेक रही थी. सेना पर दोहरा बोझ् था एक तरफ सीमापार से आतंकियो के प्रवेश को रोकना दूसरी तरफ यहां ज़िंदगी फिर से बहाल करना. सोचिये इतनी मुश्किल घडियों में भी सेना का मनोबल हिमालय से भी ऊँचा था. सोचिये रातो रात नदियों पर पुल और बेघरों को आसरा दिया. कुछ ही दिनों में बिजली पानी स्कूल सब बहाल हो गया. हर तरफ भारत माता की जय के नारे गूंज रहे थे. स्थानीय लोगों के लिए भारतीय सेना वहां किसी दोस्त की तरह हर मुश्किल घडियों में खड़ी रहती है.

बाढ़ के वक्त रेस्क्यू ऑपरेशन करते जवान
कभी उन जवानों या अधिकारियों से बात करने का मौका मिले तो कुछ समय बात जरूर कीजियेगा. मुश्किल से 25-30 साल के है ज्यादातर. आपको हैरानी होगी उन लोगों को सुनकर. क्योंकि वो लोग नेताओं या सोशल मीडिया एक्टिविस्ट की तरह कोरी लफ़्फ़ाज़ी नहीं करते हैं. बहुत कुछ सीखने को मिलेगा इन नौजवानों से. दरअसल पाक की मंशा कामयाब नहीं हो पायी यहाँ के लोगों को भड़काने की. कश्मीर में आई बाढ़ ने सेना और लोगों को बहुत करीब ला दिया. इसके बाद जब केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल हुआ तो घाटी में उम्मीद की किरण जागी कि यहाँ भी विकास का सवेरा होगा
यही बात अलगाववादियों और पाकिस्तान को रास नहीं आ रही. आम कश्मीरी दरअसल सिर्फ विकास चाहता है लेकिन उसकी बदकिस्मती है की वो अंतराष्ट्रीय राजनीती का शिकार है. कश्मीर में पर्यटन उद्योग तो अच्छा चल रहा है लेकिन बाँकी उद्योग धंधे खेती बाड़ी की दशा बहुत अच्छी नहीं है. अब तक जितनी भी सरकारें आईं
  चौक
लाखों कमाये मोबाइल से बिना पैसा खर्च किये

Wednesday, 10 June 2015

सेना ने पहली बार दूसरे देश में घुसकर आतंकियो को मारा

. मणिपुर के चंदेल जिले में बीते
चार जून को सेना पर हमला करके 18 जवानों की जान
लेने वाले उग्रवादियों को मार गिराया गया है। भारतीय सेना
ने म्यांमार में जाकर उग्रवादियों के खिलाफ चुनिंदा ठिकानों पर कार्रवाई
की है। सेना ने मंगलवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस
बात की जानकारी दी। रिपोर्ट्स
के मुताबिक, केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद
म्यांमार को साथ लेकर उग्रवादियों के खात्मे का ऑपरेशन चलाया गया
और 15 उग्रवादियों को मार गिराया गया। सेना ने कहा कि देश
की एकता और अखंडता के लिए खतरा बने
किसी संगठन से निपटने के लिए हम तैयार हैं।
सीमा पार जाकर उग्रवादियों को ढेर किया
सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल रणधीर सिंह ने कहा कि
इंटेलिजेंस से मिले इनपुट के आधार पर उग्रवादी भारत
में हमले की बड़ी साजिश रच रहे थे। इंडो-
म्यांमार बार्डर पर छिपे उग्रवादियों के खात्मे के लिए हमने म्यांमार
सरकार से बात की। इसके बाद सीमा पार
जाकर नागालैंड और मणिपुर सीमा पर दो अलग-अलग
ठिकानों पर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। हमला करने वाले
उग्रवादियों के 2 ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा
कि पड़ोसी देश की सेना के साथ हमारे
अच्छे संबंध है, भविष्य में भी आतंकवाद से लड़ने के
लिए मदद ली जाएगी।
म्यांमार में ही क्यों हुई कार्रवाई?
म्यांमार से सटी भारत की सीमा
1643 किलोमीटर लंबी है। दोनों
सीमाओं के बीच आज तक फेंसिंग
नहीं हुई। दोनों देशों के सुरक्षा बल अपने इलाकों में 16
किलोमीटर अंदर तक आजादी से
आवाजाही करने की इजाजत देते हैं।
यही वजह है कि 4 जून को उग्रवादी
मणिपुर में हमला करने के बाद म्यांमार की तरफ भाग
निकले। पूर्वोत्तरी राज्यों में कम से कम 24
उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं। इनमें से अधिकतर के
ट्रेनिंग कैम्प म्यांमार और भूटान में हैं।
अपनी सरहद से बाहर हमारी सेना ने
कब चलाए ऑपरेशन?
- 1971 : पाकिस्तान से जंग के दौरान हमारी सेना
बांग्लादेश में घुसी और उसे आजाद कराया।
- 1987 : लिट्टे को बेअसर करने के लिए भारत ने अपने शांति रक्षा
बलों के 50 हजार जवानों को श्रीलंका के जाफना में
उतारा। हमारी सेना के 1200 जवान शहीद
हुए। अभियान 1990 तक चला।
- 1988 : तख्तापलट की कोशिशें नाकाम करने के लिए
मालदीव ने भारत से मदद मांगी। भारत ने
सेना के 1400 कमांडो माले में उतारे। विद्रोहियों का बड़े पैमाने पर
सफाया किया।
- 1995 : पूर्वोत्तर के उग्रवादियों के कैम्प नष्ट करने के लिए
सेना ने म्यांमार में प्रवेश किया। यह ऑपरेशन गोल्डन बर्ड
कहलाया। 40 उग्रवादियों को मार गिराया गया।
पड़ोसी देशों से कितनी मिली
है भारत को मदद?
- म्यांमार : म्यांमार ने इससे पहले 1995 में भारतीय
सेना के साथ ऑपेशन गोल्डन बर्ड चलाया था। इसके बाद 2001 में
उसने भारत के कहने पर फिर ऑपरेशन चलाया। 200 उग्रवादियों
को गिरफ्तार किया और 1500 हथियार बरामद किए।
- भूटान : रॉयल भूटान आर्मी ने 2003 में उल्फा,
एनडीएफबी और केएलओ उग्रवादियों के
खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। 150 उग्रवादी मार गिराए।
3000 उग्रवादियों को अपनी सीमाओं से
बाहर खदेड़ दिया। उल्फा के 14, बोडो के 11 और केएलओ के 4
कैम्प नष्ट कर दिए। भूटान समय-समय पर पूर्वोत्तर के
उग्रवादियों के खिलाफ अभियान चलाता है।
- बांग्लादेश : पूर्वी नगालैंड के उग्रवादियों के खिलाफ
बांग्लादेशी सेना कार्रवाई करती है। भारत
समर्थित शेख हसीना के प्रधानमंत्री होने
के चलते बांग्लादेश पूर्वोत्तर के उग्रवादी तत्वों को
पनाह नहीं देता।
- श्रीलंका : हाल के वर्षों में सैन्य रिश्ते बिगड़े हैं।
श्रीलंकाई सेना हमारे मछुआरों पर फायरिंग
करती रहती है। दक्षिण भारत में
अमेरिकी दूतावासों पर हमले की साजिश रच
रहा आईएसआई का एक एजेंट कोलंबो स्थित
पाकिस्तानी दूतावास में पिछले साल काम करता पाया गया।
भारतीय खुफिया एजेंसी और सरकार के
दबाव में श्रीलंका ने आईएसआई अफसर को पाकिस्तान
भेज दिया।
- पाकिस्तान : भारत के खिलाफ आतंक फैलाने के मामले में सबसे
आगे। आतंकियों के खिलाफ भारत की कभी
मदद नहीं की।
- चीन : अक्साई चीन में मौजूद पाकिस्तान
समर्थित आतंकियों पर कभी कार्रवाई नहीं
की। पूर्वोत्तर के उग्रवादियों को भी हथियार
मुहैया कराने का आरोप है।
उग्रवादियों ने किया था 33 साल का सबसे खतरनाक हमला
उग्रवादियों का यह हमला बीते 33 साल में मणिपुर में
सेना पर हुआ सबसे खतरनाक था। इससे पहले, 1982 में राज्य
में इसी तरह के हमले में 20 जवान
शहीद हुए थे। उस वक्त उग्रवाद चरम पर था। यह
भी पहली बार हुआ था कि उग्रवादियों ने
आरपीजी यानी रॉकेट लॉन्चर्स
का इस्तेमाल किया। नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड
(खपलांग) ने हमले की जिम्मेदारी
ली थी। यह संगठन नगा समुदाय
की ज्यादा आबादी वाले
पूर्वोत्तरी राज्यों को मिलाकर ग्रेटर नगालैंड बनाना चाहता
है। इस संगठन के साथ करीब 2000
उग्रवादी जुड़े हैं। मणिपुर के चंदेल सहित
पहाड़ी इलाकों में भी इस संगठन
की पैठ है। इसकी केंद्र सरकार के साथ
शांति वार्ता विफल हो चुकी है।