Loot price flipcart

Showing posts with label मिसाईल .ताकत .भारत. Show all posts
Showing posts with label मिसाईल .ताकत .भारत. Show all posts

Wednesday, 15 August 2018

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

आप सभी लोगों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं





💐जलती रही चिताएँ फिर सभी मौन थें । हमें पढ़ाया जाता है कि आजादी चरखे से आईं। फिर फाँसी पर झूलने वाले नौजवान कौन थें।💐

Wednesday, 6 September 2017

पिता का बेटे के नाम वसीयत या नसीहत father

.            *"वसीयत और नसीहत"*

एक दौलतमंद इंसान ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा,

*"बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, मेरी यह इक्छा जरूर पूरी करना ।*

पिता के मरते ही नहलाने के बाद, बेटे ने पंडितजी से पिता की आखरी इक्छा बताई ।

*पंडितजी ने कहा: हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इज़ाज़त नही है।*

पर बेटे की ज़िद थी कि पिता की आखरी इक्छ पूरी हो ।

बहस इतनी बढ़ गई की शहर के पंडितों को जमा किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला ।

*इसी माहौल में एक व्यक्ति आया, और आकर बेटे के हाथ में पिता का लिखा हुआ खत दिया, जिस में पिता की नसीहत लिखी थी*

_*"मेरे प्यारे बेटे"*_

*देख रहे हो..? दौलत, बंगला, गाड़ी और बड़ी-बड़ी फैक्ट्री और फॉर्म हाउस के बाद भी, मैं एक फटा हुआ मोजा तक नहीं ले जा सकता ।*

*एक रोज़ तुम्हें भी मृत्यु आएगी, आगाह हो जाओ, तुम्हें भी एक सफ़ेद कपडे में ही जाना पड़ेगा ।*

*लिहाज़ा कोशिश करना,पैसों के लिए किसी को दुःख मत देना, ग़लत तरीक़े से पैसा ना कमाना, धन को धर्म के कार्य में ही लगाना ।*

*सबको यह जानने का हक है कि शरीर छूटने के बाद सिर्फ कर्म ही साथ जाएंगे"। लेकिन फिर भी आदमी तब तक धन के पीछे भागता रहता है जब तक उसका निधन नहीं हो जाता।*

*👉 1) जो आपसे दिल से बात करता है उसे कभी दिमाग से जवाब मत देना।*

*👉 2) एक साल मे 50 मित्र बनाना आम बात है। 50 साल तक एक मित्र से मित्रता निभाना खास बात है।*

*👉 3) एक वक्त था जब हम सोचते थे कि हमारा भी वक्त आएगा और एक ये वक्त है कि हम सोचते हैं कि वो भी क्या वक्त था।*

*👉 4) एक मिनट मे जिन्दगी नहीं बदलती पर एक मिनट सोच कर लिखा फैसला पूरी जिन्दगी बदल देता है।*

*👉 5) आप जीवन में कितने भी ऊॅचे क्यों न उठ जाएं, पर अपनी गरीबी और कठिनाई को कभी मत भूलिए।*

*👉 6) वाणी में भी अजीब शक्ति होती है। कड़वा बोलने वाले का शहद भी नहीं बिकता और मीठा बोलने वाले की मिर्ची भी बिक जाती है।*

*👉 7) जीवन में सबसे बड़ी खुशी उस काम को करने में है जिसे लोग कहते हैं कि तुम नही कर सकते हो।*

*👉 8) इंसान एक दुकान है और जुबान उसका ताला। ताला खुलता है, तभी मालूम होता है कि दुकान सोने की है या कोयले की।*

*👉 9) कामयाब होने के लिए जिन्दगी में कुछ ऐसा काम करो कि लोग आपका नाम Face book पे नही Google पे सर्च करें।*

*👉 10) दुनिया विरोध करे तुम डरो मत, क्योंकि जिस पेङ पर फल लगते है दुनिया उसे ही पत्थर मारती है।*

*👉 11) जीत और हार आपकी सोच पर ही निर्भर है। मान लो तो हार होगी और ठान लो तो जीत होगी।*

*👉 12) दुनिया की सबसे सस्ती चीज है सलाह, एक से मांगो हजारो से मिलती है। सहयोग हजारों से मांगो एक से मिलता है।*

*👉 13) मैने धन से कहा कि तुम एक कागज के टुकड़े हो। धन मुस्कराया और बोला बिल्कुल मैं एक कागज का टुकड़ा हूँ, लेकिन मैने आज तक जिंदगी में कूड़ेदान का मुंह नहीं देखा।*

*👉 14) आंधियों ने लाख बढ़ाया हौसला धूल का, दो बूंद बारिश ने औकात बता दी।*

*👉 15) जब एक रोटी के चार टुकड़े हों और खाने वाले पांच हों, तब मुझे भूख नहीं है, ऐसा कहने वाला कौन है.? सिर्फ "माँ"।*

*👉 16) जब लोग आपकी नकल करने लगें तो समझ लेना चाहिए कि आप जीवन में सफल हो रहे हैं।*

*👉 17) मत फेंक पत्थर पानी में, उसे भी कोई पीता है।*
*मत रहो यूं उदास जिन्दगी में, तुम्हें देखकर भी कोई जीता है।।।
अच्छा लगे तो औरों को भी लिंक भेजें

Friday, 28 July 2017

बिहार में हो सकती है क्रोस वोटिंग

बिहार की राजनीति में आए तूफान के बीच विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए वोटिंग शुरू हो गई है। फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा पहुंचे सीएम नीतीश कुमार ने आरजेडी के तीखे हमलों का जवाब दिया।
बिहार विधानसभा में जबरदस्त हंगामे के बीच सीएम नीतीश कुमार ने विश्वासमत का प्रस्ताव पेश कर दिया है और लालू के बेटे तेजस्वी यादव को नेता विपक्ष घोषित किया जा चुका है। नेता विपक्ष घोषित किए गए तेजस्वी ने सीएम नीतीश को 'बॉस' कह डाला और उनपर भड़कते हुए कहा कि अगर हिम्मत होती तो मुझे बर्खास्त करते।वो मुझे क्यों बर्खास्त किया

इतना ही नहीं मेरे आत्म विश्वास से नीतीश डर गए।तेजस्वी ने ये भी कहा कि नीतीश कुमार महात्मा गांधी के हत्यारों से मिल गए हैं, साथ ही उन्होंने तीखा विरोध जाहिर करते हुए कहा कि नीतीश को सुशील कुमार मोदी के साथ बैठन में शर्म नहीं आई।

आरोपों का पलटवार करते हुए बीजेपी ने कहा कि तेजस्वी को सत्ता के जाने का दर्द है। वहीं हंगामे के बीच आरजेडी हल्के अंदाज में  मांग की है कि गोपनीय ढंग में ये फ्लोर टेस्ट करवाया जाए

बता दें कि लालू यादव का साथ छोड़कर नरेंद्र मोदी का हाथ थामने वाले नीतीश कुमार 16 घंटे में ही फिर मुख्यमंत्री बन गए। उन्होंने छठी बार यह कुर्सी संभाली है। राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने बृहस्पतिवार सुबह उन्हें पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने भी बतौर उप-मुख्यमंत्री शपथ ली।

सीएम नीतीश के पक्ष में क्रॉस वोटिंग हो सकती है। क्योंकि कोई भी विधायक डूबती नाव में नही रहना चाहता उन्हें अपने राजनीतिक करियर की भी चिंता है
नीतीश के इस्तीफे के साथ आया सियासी भूचाल बुधवार देर रात तक चला। आधी रात 12 बजे के बाद नीतीश-सुशील ने राज्यपाल त्रिपाठी से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। तब तक

राज्यपाल लालू-तेजस्वी को सुबह 11 बजे मिलने का वक्त दे चुके थे। चूंकि नीतीश ने 132 विधायकों की लिस्ट सौंपी थी, राज्यपाल ने उन्हें सुबह 10 बजे ही शपथ दिलाने का फैसला सुना दिया। पहले शपथ का वक्त शाम 5 बजे तय किया गया था। ठीक सुबह 10 बजे राजभवन के राजेंद्र मंडप में राज्यपाल ने नीतीश एवं सुशील को शपथ दिलवाई और महज आठ मिनट में समारोह पूरा हो गया।

Monday, 3 July 2017

इस्राइल ने भारत के लिए जो किया दुनिया में किसी देश ने सोचा तक नही होगा , ilove you israil

मोदी जी कल यानी 4 से 6 जुलाई को इस्राइल जा रहे हैं इस्राइल यानी कि छोटा भूकंप
इस्राइल अपने देश भारत के उत्तर प्रदेश से भी छोटा है मगर पूरी अरब कंट्री उससे भय खाती है 22 मुस्लिम अरब देशों से 7 साल तक अकेले लड़ता रहा
वहां आज आजाद भारत में पहली बार कोई भारतीय प्रधान मंत्री जा रहा है क्यों
जानते है राजनीति के कारण वोटबैंक के कारण जाने से डरते थे
वहां एक हप्ते से मोदी जी की स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं वहां के पीएम तथा न्यूज़  ने यहां तक कह दिया कि दुनिया के सबसे ताकतवर एवं बड़े नेता भारत आ रहें उनसे हमे बड़ी उम्मीदें है देखिये मोदी जी के लिए इस्राइल की दीवानगी जानिए भारत के लिए सबकुछ करने वाले इस्राइल के बारे में

भारत का सबसे सच्चा दोस्त अगर है तो वो है इस्राइल
इस्राइल की स्वतंत्रता के समय भारत ने इस्राइल को मान्यता नहीं दी
संयुक्त राष्ट्र में भारत फलीस्तीन के मुद्दे पर इस्राइल के खिलाफ हमेशा रहा है तथा संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल भारत के साथ
1992 में जाकर भारत तथा इस्राइल के बीच कूटनीतिक सम्बन्ध स्थापित हुए फिर भी इस्राइल के सहयोग से ही हम 1962 में चीन से  टक्कर ले सके थे

1965 में इस्राइल ने हमें चोरी छिपे हथियार दिये थे पाक से जंग के लिए
मगर सबसे बड़ी दोस्ती इस्राइल ने तब निभाई जब 1971 भारत -पाक युद्ध में उसका सबसे खास सहयोगी अमेरिका भारत को तबाह करने के लिए तथा पाक के समर्थन के लिए अपनी पूरी 7वी नोसेना बेड़ा भेज दिया था भारत से कूटनीतिक सम्बन्ध ना होते हुए भी  भारत के लिए अपनी हथियारों की तिजोरी खोल दी थी और जरूरत की हथियार भारत को दी थी

कीजिये ऑनलाइन कमाई अपने मोबाइल से

इजरायल, भारत का मित्र देश रहा है। 1962 में भारत-चीन युद्ध, 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध के समय इजरायल ने भारत को आधुनिक सैन्य तकनीक मुहैया कराई
।प्लीज़ दोस्तों मेरा यूट्यूब चैनल लाइक और सब्सक्राइब करें
1999 के करगिल युद्ध में  एक सैन्य जासूसी उपग्रह लीज पर देने के साथ भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ को दो जासूसी विमान भी बेचे।

1999 कारगिल युद्ध में भारत जब अपने बोफोर्स तोपों से गोले बरसा रहा था तो हमारी गोलों की स्टोर खत्म होने को हुई उस समय हमारा सहयोगी रूस भी कम ना आया क्योंकि हम परमाणु परीक्षण के कारण अमेरिका चीन आदि देशों का प्रतिबंध झेल रहे थें सो रूस अमेरिका के दबाव में हमे गोले नहीं दिए
हमें  टैंक के गोले बनाने की तकनीक नहीं थी
उस समय सिर्फ इस्राइल ने ही हमे अपने स्टोर से गोले की सप्लाई की थी  आज
हमे बराक 8 की टेक्नोलॉजी , ड्रोन , रडार आदि की सप्लाई तथा टेक्नोलॉजी दे रहा  है
दोस्तों अगर आपको यह लेख अच्छ लगे तो इसका लिंक  शेयर जरूर कीजिये गा व्हाट्सएप , फेसबुक आदि पे जय हिंद
अगर आप हमसे कुछ कहना चाहते हैं तो 

Tuesday, 27 June 2017

क्या यह हैं मोदी जी का विकल्प option modi

अगर आप जल्दी में हैं तो बाद मे जब आप फ़ुर्सत मे हो तब पढ लीजिएगा.किंतु पढना धैर्य और शांति से और तत्पश्चात निश्कर्ष निकालना.

👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇👇

भारत में बहुत से लोग है,
जो भ्रष्ट नेताओं की बातों में आकर नरेन्द्र मोदी का विरोध करते है
अच्छा है,
 लोकतंत्र है विरोध करें या समर्थन ये तो आपका अपना हक है
पर मोदी का विरोध करके आप समर्थन किसका कर रहे हो ?ये बडा गंभीर सवाल है इसलिए निर्णय भी गंभीरता पूर्वक ही होना चाहिए .

*क्या मुलायम, लालू, मायावती, सोनिया,राहुल  केजरीवाल, ममता बनर्जी, वामपंथी
ये सब नरेन्द्र मोदी से बेहतर है ??
या इनका रिकॉर्ड बेहतर है ??

* क्या नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्रीकाल की तुलना मे ममता बनर्जी, नितिश .अखिलेश आदि बेहतर नजर आता है ?तुलना करनी है तो  गुजरात के किसी छोटे शहर मे जाकर 1 नजर मार लीजिये और फिर इन अन्य राज्यो की राजधानी का भ्रमण कीजिए .

* राजनीति मे प्रवेश के समय लालू और मुलायम,
 दोनों के घर की ऐसी स्तिथि थी की, 1 के घर पर साइकिल और एक के घर पर लालटेन खरीदने तक के पैसे नहीं थे,
जाति के नाम पर चलने वाले नेता, आज अरबपति है,
रामगोपाल चार्टर्ड प्लेन में घूमते है, तो शिवपाल महँगी ऑडी मे कहाँ से आया इतना अकुत धन ?ये लोग नरेन्द्र मोदी से
बेहतर है ?

*  सोनिया जी के बेटा-बेटी और दामाद आज सभी अरबपति है, 10 साल का  इनका राज हाल में ही  बीता है, क्या ये नरेन्द्र मोदी से बेहतर है ??

* 35 साल बंगाल में राज करने वाले वामपंथी, नरेन्द्र मोदी से बेहतर है ?

* 5 साल केजरीवाल, 5 साल केजरीवाल, का विज्ञापन चलाकर दिल्ली के लोगों को चुना लगाने वाला, WIFI, CCTV, 150 कॉलेज, 500 स्कुल क्या केजरीवाल नरेंद्र मोदी से बेहतर है ?

* जब मायावती राजनीती करने निकली थी, और कांशीराम की साथी थी, तब उसके घर में दिया जलाने का धन नहीं था, साईकल से प्रचार करती थीआज उसका सैंडल भी प्लेन से आता है, उसके भाई के पास सैकड़ो  कंपनिया है अरबों  रुपये का बैंक बैलेंस मिला है
, क्या मायावती नरेंद्र मोदी से बेहतर है ???

अरे मोदी का विरोध करने वालो, विरोध करो, पर समर्थन किसका करना है ये तो तय करो कोई बेहतर विकल्प हो तो बताना जरुर.

थोड़ा देश का भी सोचो, कितना बर्बाद करवाना है, कितना लूटवाना है ?अरे बाहर निकलो जातियो के बंधनो से इसे उबारकर ये लूटेरे हमे ही लूटते है.

 *****मान लो कि मैं मूर्ख हूँ और****...

● मुझे नहीं मालूम कि मैं मोदी जी को क्यों पसंद करता हु । लेकिन मेरे पास कांग्रेस , सपा ,बसपा , आप को नापसंद करने के बहुत कारण है ।

● मुझे नहीं मालूम कि अच्छे दिन आएंगे कि नहीं,
 पर मोदी जी के अतिरिक्त और कोई राजनेता दूर दूर तक दिखाई नहीं देता जो भारत के अच्छे दिनों के लिए तन और मन से प्रयत्न करता हो

● मुझे ये भी नहीं मालूम कि मोदी जी भारत को हिन्दू राष्ट्र बना पायेगे या नहीं । लेकिन, इसका पूरा यकीन हैं कि वो पूरी संजीदगी और गंभीरता से भारत माता को पुनः विश्वगुरु का दर्जा दिलवाने हेतु प्रयासरत है ।

● मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मोदी के पास 56 इंच का सीना हैं या नहीं। लेकिन ये पता हैं कि उनके सीने में 'दम' हैं 'दमा' नहीं।

● मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता अगर मोदी से देश के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी नाराज हैं, क्यूंकि मुझे यकीन है उनके आने के बाद युवा पीढ़ी बहुत खुश है

● मुझे ज्ञात नहीं कि मोदी देश का कितना विकास कर पाएंगे, लेकिन मुझे यकीं है वो अपनी जिम्मेवारियां उठाने में कोई कसर बाकि नहीं रखेंगे।

● मुझे फर्क नहीं पड़ता कि मोदी जी के पास इतिहास की जानकारी हैं या नहीं। मुझे पक्का यकीन हैं उनके पास भविष्य की पूरी तैयारी है ।
▪अपने मुख्यमन्त्री काल में गुजरात मे मोदी ने
कोई भृष्टाचार घपला परिवार के किसी भी सदस्य के लिए कुछ भी गलत जमा या पक्षपात किया है ??

● हां वाकई मुझे नहीं पता कि भविष्य में बीजेपी हारेगी या जीतेगी पर देश का सजग नागरिक होने के नाते ये जरुर चाहता हूँ कि मेरा देश जीतना चाहिए.
                       जय हिंद

Thursday, 30 March 2017

मेरे वतन की नई तस्वीर बन रही है



💥68 साल पहले- एक गुजराती ने देश को"अंग्रेजों"से,"मुक्त"किया था !!

💥अब 68 साल बाद,एक गुजराती ने,देश को"कांग्रेस"से,"मुक्त"किया है !!

💥पहले वाला-गुजराती 'नोटो' पर छा गया !!!

💥अभी वाला-गुजराती 'वोटों' पर छा गया !!

💥 ऐ दोस्त - खिडकिया खोल के देखने दे,मुझे ..?????

💥मेरे वतन की,"नई तस्वीर"बन रही है !!!

🌻आज,भारत- फिरसे"आजाद" हुआ !!

💥➖पहले - "इग्लेड की रानी से!

💥 और आज :--💥

💥➖" ------------- से " !!!पैसे कमायें बिना इन्वेस्ट के अपने मोबाइल से

💥➖जो,पढ़ सके न खुद, किताब मांग रहे हैं ???

💥➖खुद, रख न पाए, वो हिसाब मांग रहे हैं ????

💥➖जो, कर सके न साठ साल में- कोई विकास देश का, वो 2 साल में जवाब मांग रहे हैं ????

💥➖आज - गधे गुलाब मांग रहे हैं?? चोर लुटेरे इन्साफ मांग रहे हैं??

💥➖जो Loot te रहे देश को,60 सालों तक ???

   💥सुना है,आज वो- 2 साल का हिसाब मांग रहे हैं??

💥 वर्षों बाद - एक नेता को,माँ गंगा की आरती करते देखा है !!

💥वरना - अब तक, एक परिवार की समाधियों पर,"फूल चढ़ते"देखा है।!!

💥वर्षों बाद - एक नेता को,अपनी"मातृभाषा"में बोलते देखा है ।!

💥वरना - अब तक,रटी रटाई "अंग्रेजी"बोलते देखा है।!

💥 ➖अब तक -एक परिवार की मूर्तियां बनते देखा है।!

💥वर्षों बाद-: एक नेता को,"संसद की माटी चूमते"देखा है !!

💥वर्षों बाद - एक नेता को,"देश के लिए रोते"देखा है !!

💥वरना - अब तक,"मेरे ---मार दिया"कह कर,वोटों की भीख मांगते देखा है।!

💥➖पाकिस्तान को घबराते देखा है !!

💥➖अमेरिका को झुकते देखा है।

💥इतने वर्षों बाद-भारत माँ को, खुलकर"मुस्कुराते"देखा है।

💥आप सभी से"निवेदन"है, इस मेसेज को,पुरे भारत ke,

हर एक नागरीक तक,पहुचाने में मेरी मदद करें! !! शेयर लिंक प्लीज़

Monday, 13 March 2017

pm modi ke sath chalne wale SPG ke hath me breefkes ka raj

आपने देखा होगा जब प्रधानमंत्री का काफिला चलता है तब कुछ काले कोट और पेंट में वेपन के साथ, और कुछ हाथ में ब्रीफ़केस लिए होता है, शायद आज कल आप सोच ही रहे होंगे की आखिर इनके बैग में होता क्या है, मैंने कई लोगो से बात की तो बोले की शायद जरुरी की फाइल्स होती होगी, कुछ लोगों ने कहा कि इसमें। परमाणु बम का पासवर्ड (रिमोट) होता है इस बैग में कुछ और ही होता है! ब्रीफकेस का यह राज भी बहुत मुश्किलों से पता चला है, क्योंकि उनकी सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एंजेसियां कोई खतरा नहीं लेना चाहती हैं। इसलिए पीएम कि सुरक्षा से जुड़ी कोई जानकारी लीक नहीं होती है।यह ब्रीफकेस कोई आम ब्रीफकेस नहीं है, अगर ऐसा कहा जाए की इसमें पीएम मोदी की जान बसती है तो कोई गलत  नहीं होगी। चलिए आपको बता देते हैं की इस ब्रीफकेस में पीएम की सुरक्षा के लिए एक विशेष प्रकार की पिस्टल होती है। अगर पीएम पर कोई खतरा हो तो,  ये बॉडीगार्ड इस स्थिती में ब्रीफकेस गन निकाल सकते हैं।

छोटा सा दिखने वाला यह ब्रीफकेस किसी भी खतरे को दौरान लगभग हर तरह की गोलीबारी से पीएम कि रक्षा कर सकता है। दरअसल, यह ब्रीफकेस एक ही झटके में इतना बड़ा बन जाता है, कि पीएम को पूरा ढ़क सके। इस ब्रीफकेस पर किसी भी गोली का असर नहीं होता है। इस तरह ये ब्रीफकेस पीएम के लिए एक सुरक्षा कवच जैसा है।


प्रधानमंत्री के काफिले में जो सिक्यूरिटी होती है उसको एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन फ़ोर्स) कहा जाता है, और उनके साथ काउंटर अटैक टीम भी होती है, जो किसी भी परिस्थिति में वो जवाब दे सकती है, इन लोगों के पास अत्याधुनिक हथियार होता है, वो मिनट में दुश्मन पर काबू पा सकते है,



सिक्यूरिटी गार्ड हमेशा इस बैग के साथ मुस्तैद रहता है, आप ध्यान से देखे तो साइड एक एक छोटा सा होल है, जैसे कभी कोई खतरा महसूस होता है, तुरंत सिक्यूरिटी अपना पोजीशन ले लेता है, और दुश्मन पर हमला कर देता है,



इस ब्रीफ़केस में एक बटन होता है जिसको प्रेस करने ही, पूरा ब्रीफ़केस खुल जाता है, और ये बुलेटप्रूफ होता है. और अत्याधुनिक हथियार से लेस होता है.



तो अब आपको समझ आ गया होगा, की आखिर इस ब्रीफ़केस में क्या होता है,


Tuesday, 7 March 2017

कुदरत का वरदान सहजन


दुनीया का सबसे ताकतवर पोषण पुरक आहार है सहजन (मुनगा) 300 से अधि्क रोगो मे बहोत फायदेमंद इसकी जड़ से लेकर फुल, पत्ती, फल्ली, तना, गोन्द हर चीज़ उपयोगी होती है

*आयुर्वेद में सहजन से तीन सौ रोगों का उपचार संभव है
*सहजन के पौष्टिक गुणों की तुलना
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
1-विटामिन सी- संतरे से सात गुना
2-विटामिन ए- गाजर से चार गुना
3-कैलशियम- दूध से चार गुना
4-पोटेशियम- केले से तीन गुना
5-प्रोटीन- दही की तुलना में तीन गुना

*स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट , प्रोटीन , कैल्शियम , पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम,
विटामिन-ए , सी और बी-काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाई जाती है

*इनका सेवन कर कई बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सकता है, इसका बॉटेनिकल नाम ‘ मोरिगा ओलिफेरा ‘ है हिंदी में इसे सहजना , सुजना , सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं.

*जो लोग इसके बारे में जानते हैं , वे इसका सेवन जरूर करते हैं

*सहजन में दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दोगुना प्रोटीन पाया जाता है.

* ये हैं सहजन के औषधीय गुण सहजन का फूल पेट और कफ रोगों में , इसकी फली वात व उदरशूल में , पत्ती नेत्ररोग , मोच , साइटिका , गठिया आदि में उपयोगी है

*इसकी छाल का सेवन साइटिका , गठिया , लीवर में लाभकारी होता है। सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात और कफ रोग खत्म हो जाते हैं

*इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया , साइटिका , पक्षाघात , वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है। साइटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है.

*मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं और मोच के स्थान पर लगाने से जल्दी ही लाभ मिलने लगता है |

*सहजन की सब्जी के फायदे.
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सहजन के फली की सब्जी खाने से पुराने गठिया , जोड़ों के दर्द , वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है।

इसके ताजे पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है साथ ही इसकी सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है,
.

*इसकी जड़ की छाल का काढ़ा सेंधा नमक और हिंग डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है

*सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के किड़े निकालता है और उल्टी-दस्त भी रोकता है

*ब्लड प्रेशर और मोटापा कम करने में भी कारगर सहजन का रस सुबह-शाम पीने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है

ये भी पढ़े :   लिवर की खराबी का पक्का रामबाण उपाय वो भी सिर्फ 15 दिनों में, जरूर पढ़े और शेयर करे

*इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे-धीरे कम होनेलगता है

*इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है

*इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होता है इसके अलावा इसकी जड़ के काढ़े को सेंधा नमक और हिंग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।

*इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सूजन ठीक होते हैं

*पानी के शुद्धिकरण के रूप में कर सकते हैं इस्तेमाल सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

*इसके बीज को चूर्ण के रूप में
पीसकर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लेरीफिकेशन एजेंट बन जाता है यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है , बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है।

*काढ़ा पीने से क्या-क्या हैं फायदे
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
कैंसर और पेट आदि के दौरान शरीर के बनी गांठ , फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन , हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द) , जोड़ों में दर्द , लकवा ,दमा,सूजन , पथरी आदि में लाभकारी है |

* सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है। आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से वायरस से होने वाले रोग , जैसे चेचक के होने का खतरा टल जाता है

*शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है , जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में विटामिन-सी की मात्रा बहुत होती है। यह शरीर के कई रोगों से लड़ता है

*सर्दी-जुखाम
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
यदि सर्दी की वजह से नाक-कान बंद हो चुके हैं तो , आप सहजन को पानी में उबालकर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।

*हड्डियां होती हैं मजबूत.
•••••••••••••••••••
•••••••••••••••••••••••
सहजन में कैल्

Sunday, 5 March 2017

यदुवंश का रहस्य (इतिहास) story yadav


आज जो बाते आपको बताने वाला हु वो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ।

कुछ लोग हमारे इतिहास से खिलवाड़ करके खुद को यदुवंश से जोड़नेका प्रयास कर रहे है वो तरह तरह की अफवाह फ़ेला रहे है इसके लिए अनेको तर्क देते है आज मै उनका सच आपको बताने जा रहा हु
1 कुछ लोग तर्क देते है कि वासुदेव (राजपूत)और नंदबाबा (यादव\अहीर) अलग अलग अलग जाति से थे जबकि सच ये है की दोनों क्षत्रिय यादव थे ।जबकि राजपूत शब्द तो 12वी शताब्दी तक कही भीअस्तित्व में ही नही था।
क्षत्रियों का प्रधान वंश यादव वंश है...यादव-कुल की एक अति-पवित्र शाखा ग्वालवंश है जिसका प्रतिनिधित्व नन्द बाबा करते थे .. .. बहुत से अज्ञानी दोनों को अलग -अलग वंश का बताते हैं....मूर्खों को ये मालूम नहीं की नन्द बाबा और कृष्ण के पिता वासुदेव रिश्ते में भाई थे जिसे हरिवंश पुराण में पूर्णतः स्पष्ट किया गया है....
भागवत पुराण में भी इस बात का जिक्र है.....ठीक इसी प्रकार वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी (बलराम जी की माता ) और माता यशोदा सगी बहने थी ।
ग्वालवंश में ही समस्त यादवों की कुल-देवी माँ विंध्यवासिनी देवी ने जन्म लिया था..
भागवत पुराण के अनुसार तो भगवान् श्रीकृष्ण के गोकुल प्रवास के दौरान सभी देवी-देवताओं ने ग्वालों के रूप में अंशावतार लिया था...
इसीलिए ग्वालवंशको अति-पवित्र माना जाता है।
2 कुछ महामूर्ख यादव और अहीर को भी अलग बताते है..अहि का अर्थ संस्कृत में सर्प होता है और अहीर का मतलब सर्प दमन होता है...ऋग वेद में राजा यदु का वर्णन है..इसीलिए उनके वंशज यादव-वैदिक क्षत्रिय है...ऋग वेद में महाराज यदु को वन में एकसांप को मारने की वजह से 'अहीर' की संज्ञा दी गयी है..बाद में कालिया नाग के दमन के पश्चात् श्रीकृष्ण को भी अहीर कहा गया .अहीर का अर्थ निर्भय भी होता है .
3 हरियाणा राज्य का नाम भी अहीरों के नाम पर पड़ा है पहले इसको अभिरयाणा बोला जाता था समय के साथ भाषा के बदलाव के कारण अहिराना - हीराना -हरियाणा हो गया ।
4 आज कल कुछ मुर्ख लोग बोल रही है श्री कृष्ण राजपूत है और ये खुद को यदुवंश से जोड़ने लगे इसके लिए तर्क देते है कि मथुरा Vrindavan और काफी जगह कृष्ण जी के साथ "ठाकुर" शब्द प्रयोग होता है इसलिए वो राजपूत है उन महामुर्खो को बता दू कि ठाकुर एक उपाधि है जिसका अर्थ होता है पालन करता ( जो गरीब और असहाय लोगो की सहयाता करता हो ) ये ठाकूर शब्द इसलिए ही प्रयोग होता है । और ठाकुर शब्द ठीक उसी प्रकार की उपाधि है जेसे चौधरी राव नम्बरदार मुखिया etc. ठाकुर मध्यप्रदेश में हरिजन जाती और up में नाई जाती भी प्रयोग करती है । वैसे भी महाभारत में साफ साफ लिखा कृष्ण जी यादव थे ।
5 आमतोर पर कहा जाता है कि कृष्ण जी ने 16000 शादिय की थी मगर सच ये है की प्राग्ज्योतिष के राजा नरकासुर ने 16000 राज कन्याओ को कैद कर रखा था श्री कृष्ण ने इस राक्षस को मारकर इन राजकन्याओ को आजाद करवाया और उनको समाजिक सुरक्षा देने के लिए आज के नारी निकेतन की तरह उनके रहने का प्रबध किया था । ये बात विष्णु पुराण और महाभारत में प्रमाणित है ।
6 तर्क दिया जाता है कि गंधारी के श्राप के कारण श्री कृष्ण के शरीर त्याग (सरस्वती नदी के तट पर) के बाद सारे यादव मर गये थे परन्तु आज भी भारत देश में यादव सबसे बड़ी जाति के रूप में मोजूद है हां श्री कृष्ण के बाद यादवी संघर्ष हुए थे (सोमनाथ के करीब) लेकिन उनमे कुछ मुर्ख यादव राजा मारे गये थे वहा आज भी 110 में से 88 गाव मोजूद है जो बादलपुरा अहीर से तलाला तक फेले है ।
7 कई जगह लिखा गया है कि समुद्र में मूसल चूर्ण डालने के कारण पटेरा(एक पणियर घास ) बना जिसकी मार से सारे यादव मारे गये थे लेकिन समुद्र किनारे प्रभास क्षेत्र मोजूद है और यादव भी मोजूद है तो फिर ये घास आज तलवार बनकर यादवों को क्यों नही मार रही..??
और जब मथुरा उत्तरप्रदेश से कृष्ण जगतगुरुम् हरीयाणा गुजरात गये साथ यादव सेना भी साथ चलने लगी गुजरात मे जहा जगह मिली वहा कृष्ण जी की यादव सेना रहने लगी तब प्रदेश से जाने जाते थे राजकोट मोरबी कच्छ प्रदेश मच्छु से जाना जाता था तब मच्छो यादव कहलाता और सोरठ मे रुके वो सोरठ के यादव पंचाल मे रुके वो पंच जन्म पंचोली यादव लेकीन हम तो कृष्ण के वंशज ऐक ही है हम क्यु पुरानि बातो का ठेका लेकर चलते है अभी भी तब हमारे बुजुर्गो जिन प्रदेश मे रहते थे वहा के यादव कहते थे मगर वो यादव नहि की हम अलग अलग है मगर उनका भी कारन है ये इस समय के व्यापारी मनुवादी सोच ने हमे पुरे भारत वर्ष मे जुदा करने का प्लान बनाया था क्यु की हिंदुस्तान मे सब से आबादी कृष्ण वंश यदुविरो की थी उनको पता था की ऐक समय वो हमारे पर राज करेंगे तब ही उस ने हमारे बिना पढे लीखे बुजुर्गो को जात मे बटवारे करवा दीये अब संभल ने का समय आ गया पुरे भा

 

Monday, 30 January 2017

इन्ही तीन बातों पर दुनिया टिकी है

(1) तीन बातें चरित्र को गिरा देती हैं - चोरी, निंदा और झूठ।

(2) तीन चीज़ें किसी का इन्तजार नहीं करती - समय, मौत, ग्राहक‬:
(3) तीन चीजों से सदा सावधान रहिए - बुरी संगत, परस्त्री और निन्दा।
 (4)तीन चीज़ें कमज़ोर बना देती है - बदचलनी, क्रोध और लालच।
(5)‬: तीन चीज़ें जीवन में एक बार मिलती है - मां, बांप, और जवानी
(6)तीन चीजों में मन लगाने से उन्नति होती है - ईश्वर, परिश्रम और विद्या।
‬(7)तीनों चीजों को हमेशा वश में रखो - मन, काम और लोभ
(8) तीन चीज़ें कोई चुरा नहीं सकता - अकल, चरित्र, हुनर।
(9)तीनों व्यक्ति पर सदा दया करो - बालक, भूखे और पागल
 मिट्टी मटका,

"और"
परिवार की कीमत.....
सिर्फ बनाने वाले जानता है,
तोड़ने वाला नही.....!!!!!
‬: तीन व्यक्ति वक़्त पर पहचाने जाते हैं - स्त्री, भाई, दोस्त।

Thursday, 26 January 2017

Happy Republic day

हम इण्डिया, हम है भारत, हम है हिन्दुस्तान से,*

रविन्द्र नाथ को नमन हमारा,आदर और सम्मान से

हिन्दी, तमिल, बंगाली में, लिखे है कई गान,

रविन्द्र जी रिणी है भारत, लेकर राष्ट्रगान।

राष्ट्रगान है शान हमारी, भारत की मर्यादा है,

लज्जित न होगा कभी तिरंगा, हम वीरों का ये वादा है।।*

जय भारत            जय हिंद           जय भारत


Monday, 26 December 2016

हिंदू सम्राट महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-

मोदी सरकार ने हमें गर्व से भर दिया यह स्मारक दुनिया में सबसे ऊंचा होगा जिसकी ऊंचाई 192 मीटर होगी. इस स्मारक की लागत करीब 3,600 करो


ड़ रुपये आंकी गई है.
महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-

1... महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोड़े समेत दुश्मन सैनिक को काट डालते थे।

2.... जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे ।  तब उन्होने अपनी माँ से पूछा कि- हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर आए ? तब माँ का जवाब मिला- ”उस महान देश की वीर भूमि हल्दी घाटी से एक मुट्ठी धूल लेकर आना,  जहाँ का राजा अपनी प्रजा के प्रति इतना वफ़ादार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले अपनी मातृभूमि को चुना ।”
लेकिन बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया था |
“बुक ऑफ़ प्रेसिडेंट यु एस ए ‘ किताब में आप यह बात पढ़ सकते हैं |

3.... महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलोग्राम था और कवच का वजन भी 80 किलोग्राम ही था|
कवच, भाला, ढाल, और हाथ में तलवार का वजन मिलाएं तो कुल वजन 207 किलो था।

4.... आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं |

5.... अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है, तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे,  पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी|
लेकिन महाराणा प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया |

6.... हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और अकबर की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए |

7.... महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुआ है,  जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है |

8.... महाराणा प्रताप ने जब महलों का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगों ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा कि फौज के लिए तलवारें बनाईं | इसी
समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गाढ़िया लोहार कहा जाता है|
मैं नमन करता हूँ ऐसे लोगो को |

9.... हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में तलवारें पाई गई।
आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 में हल्दी घाटी में मिला था |

10..... महाराणा प्रताप को शस्त्रास्त्र की शिक्षा "श्री जैमल मेड़तिया जी" ने दी थी,  जो 8000 राजपूत वीरों को लेकर 60000 मुसलमानों से लड़े थे। उस युद्ध में 48000 मारे गए थे । जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे |

11.... महाराणा के देहांत पर अकबर भी रो पड़ा था |

12.... मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में
अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था । वो महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा बिना भेदभाव के उन के साथ रहते थे ।
आज भी मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत हैं, तो दूसरी तरफ भील |

13..... महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक महाराणा को 26 फीट का दरिया पार करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ | उसकी एक टांग टूटने के बाद भी वह दरिया पार कर गया। जहाँ वो घायल हुआ वहां आज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है, जहाँ पर चेतक की मृत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर है |

14..... राणा का घोड़ा चेतक भी बहुत ताकतवर था उसके
मुँह के आगे दुश्मन के हाथियों को भ्रमित करने के लिए हाथी की सूंड लगाई जाती थी । यह हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे|

15..... मरने से पहले महाराणा प्रताप ने अपना खोया हुआ 85 % मेवाड फिर से जीत लिया था । सोने चांदी और महलो को छोड़कर वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में
घूमे ।

16.... महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और लम्बाई 7’5” थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे हाथ में।

महाराणा प्रताप के हाथी
की कहानी:

मित्रो, आप सब ने महाराणा
प्रताप के घोड़े चेतक के बारे
में तो सुना ही होगा,
लेकिन उनका एक हाथी
भी था। जिसका नाम था रामप्रसाद। उसके बारे में आपको कुछ बाते बताता हुँ।

रामप्रसाद हाथी का उल्लेख
अल- बदायुनी, जो मुगलों
की ओर से हल्दीघाटी के
युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है।

वो लिखता है की- जब महाराणा प्रताप पर अकबर ने चढाई की थी,  तब उसने दो चीजो को ही बंदी बनाने की मांग की थी ।
एक तो खुद महाराणा
और दूसरा उनका हाथी
रामप्रसाद।

आगे अल बदायुनी लिखता है
की-  वो हाथी इतना समझदार व ताकतवर था की उसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया था ।

वो आगे लिखता है कि-
उस हाथी को पकड़ने के लिए
हमने 7 बड़े हाथियों का एक
चक्रव्यूह बनाया और उन पर
14 महावतो को बिठाया,  तब कहीं जाकर उसे बंदी बना पाये।

अब सुनिए एक भारतीय
जानवर की स्वामी भक्ति।

उस हाथी को अकबर के समक्ष पेश किया गया ।
जहा अकबर ने उसका नाम पीरप्रसाद रखा।

रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने
और पानी दिया।

पर उस स्वामिभक्त हाथी ने
18 दिन तक मुगलों का न
तो दाना खाया और न ही
पानी पिया और वो शहीद
हो गया।

तब अकबर ने कहा था कि-
जिसके हाथी को मैं अपने सामने नहीं झुका पाया,
उस महाराणा प्रताप को क्या झुका पाउँगा.?

इसलिए मित्रो हमेशा अपने
भारतीय होने पे गर्व करो।

पढ़कर सीना चौड़ा हुआ हो ब्लॉग को
तो शेयर कर देना।

बचपन की सच्ची कहानी

*कभी हम भी.. बहुत अमीर हुआ करते थे* *हमारे भी जहाज.. चला करते थे।*

*हवा में.. भी।*
*पानी में.. भी।*

*दो दुर्घटनाएं हुई।*
*सब कुछ.. ख़त्म हो गया।*

                *पहली दुर्घटना*

जब क्लास में.. हवाई जहाज उड़ाया।
टीचर के सिर से.. टकराया।
स्कूल से.. निकलने की नौबत आ गई।
बहुत फजीहत हुई।
कसम दिलाई गई।
औऱ जहाज बनाना और.. उडाना सब छूट गया।

                 *दूसरी दुर्घटना*

बारिश के मौसम में, मां ने.. अठन्नी दी।
चाय के लिए.. दूध लाना था।कोई मेहमान आया था।
हमने अठन्नी.. गली की नाली में तैरते.. अपने जहाज में.. बिठा दी।
तैरते जहाज के साथ.. हम शान से.. चल रहे थे।
ठसक के साथ।
खुशी खुशी।
अचानक..
तेज बहाब आया।
और..
जहाज.. डूब गया।

साथ में.. अठन्नी भी डूब गई।
ढूंढे से ना मिली।

मेहमान बिना चाय पीये चले गये।
फिर..
जमकर.. ठुकाई हुई।
घंटे भर.. मुर्गा बनाया गया।
औऱ हमारा.. पानी में जहाज तैराना भी.. बंद हो गया।

आज जब.. प्लेन औऱ क्रूज के सफर की बातें चलती हैं , तो.. उन दिनों की याद दिलाती हैं।

वो भी क्या जमाना था !

और..
आज के जमाने में..
मेरे बेटी ने...  
पंद्रह हजार का मोबाइल गुमाया तो..

मां बोली ~ कोई बात नहीं ! पापा..
दूसरा दिला देंगे।

हमें अठन्नी पर.. मिली सजा याद आ गई।

फिर भी आलम यह है कि.. आज भी.. हमारे सर.. मां-बाप के चरणों में.. श्रद्धा से झुकते हैं।

औऱ हमारे बच्चे.. 'यार पापा ! यार मम्मी !
कहकर.. बात करते हैं।
हम प्रगतिशील से.. प्रगतिवान.. हो गये हैं।

कोई लौटा दे.. मेरे बीते हुए दिन।।
         

☔🙏
माँ बाप की लाइफ गुजर जाती है *बेटे
की लाइफ बनाने में......*
और बेटा status_ रखता है---
"*My wife is my Life*"
love is life

Saturday, 24 December 2016

नोटबंदी की असली वजह


अभी हमने एक अखबार में पढ़ा की श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी पार्टी के वरिष्ट सहयोगी के नोटबंदी के प्रस्ताव पर कही थीं की हमारी पार्टी को आगे चुनाव नहीं लड़ना है क्या  ??????????????????
समझे पहले पार्टी प्यारी फिर देश  यही हमारी देश की बिडम्बना है जिसको जनता ने खुलकर फैसला लेने का पॉवर दिया(सालों बाद पूर्ण बहुमत)उसको उन्ही के द्वारा रोका जा रहा है जिसको साथ में जनता ने नकार दिया ।
आज हम आपको बता रहें है नोटबैन कि सच्चाई
कांग्रेसी सरकारों ने देश को खोखला कर दिया है खून चूस लिया है अंदर से बेकार हो गया है हमारा देश अगर हमें समय पर pm मोदी  जैसा देशभक्त डॉक्टर ना मिला होता तो ?????
हमारा देश 2021 तक महंगाई ,भूखमरी , आर्थिक संकट,भ्रस्टाचार आदि दिक्कतों से घिर जाता हमारा देश कमजोर हो जाता हम अपने सैनिकों को वेतन नहीं दे पाते हथियार नहीँ खरीदपाते  लड़ने की तो बात ही छोड़िये क्यों
की हमारे देश की आर्थिक वैल्यू दुनिया में कमजोर होती जा रही थी  क्यों की हमारे  देश में लगभग एक लाख करोड़ रुपये का जाली नोट बाजार में चल रहा था जो पांच सौ तथा एक हजार रुपये के सक्ल में थे जिसके डर की वजह से कोई विदेशी हमारा रुपया लेने से डरते थे इसीलिए हमारा रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता जा रहा था देखिये डॉलर के मुकाबले रुपये की किस के शासन में कितना कमजोर
1947 में 1 डालर = 1.00 रूपये
1966 में 1 डालर = 7.50 रूपये
1975 में 1 डालर = 8.40 रूपये
1984 में 1 डालर = 12.36 रूपये
1990 में 1 डालर = 17.50 रूपये
1991 में 1 डालर = 24.58 रूपये
1992 में 1 डालर = 28.97 रूपये
1995 में 1 डालर = 34.96 रूपये
2000 में 1 डालर = 46.78 रूपये
2001 में 1 डालर = 47.93 रूपये
2002 में 1 डालर = 48.98 रूपये
2003 में 1 डालर = 45.57 रूपये
2004 में 1 डालर = 43.84 रूपये
2005 में 1 डालर = 46.11 रूपये
2007 में 1 डालर = 44.25 रूपये
2008 में 1 डालर = 49.82 रूपये
2009 में 1 डालर = 46.29 रूपये
2010 में 1 डालर = 45.09 रूपये



2011 में 1 डालर = 51.10 रूपये
2012 में 1 डालर = 54.47
2014 में  1 डॉलर =61.66 रूपय       भाजपा के शासन (अटल जी) कल मैं रुपया काफी मजबूत हो गया था ----
2000 में 1 डालर = 46.78 रूपये
2001 में 1 डालर = 47.93 रूपये
2002 में 1 डालर = 48.98 रूपये
2003 में 1 डालर = 45.57 रूपये
2004 में 1 डालर = 43.84 रूपये    
    आज 9 नवम्बर को 66.85 रुपये है आप देख सकते है हमारे देश की हालत तथा 3लाख करोड़ का ब्लैक मनी भी तो मिली ।  उसे जाली नोट रूपी वायरस को शरीर रूपी देश से बाहर निकलना जरूरी था
या अपदेख रहे है आतंकवादी हमला काम ,कश्मीर में पत्थरबाजी बन्द ,अबतक 800 सौ से ज्यादा नक्सली का आत्मसमर्पण कई टन गैर कानूनी सोना जब्त  ।जरा ध्यान दीजिए सभी दल इस बड़ी उपलब्धि पर देश का ध्यान भटकाना चाहते हैं हमारा देश फिर स्वस्थ हो उठे इसलिए आपसे हाथ जोड़कर सहयोग दें बस एक महीने तक जय हिंद ।
आपका अजय यादव

Saturday, 8 October 2016

एक बूढ़ी माँ की दिल को छू लेने वाली सच्ची कहानी

ऑफिस से निकल कर शर्माजी ने

स्कूटर स्टार्ट किया ही था कि उन्हें याद आया,
.
पत्नी ने कहा था,१ दर्ज़न केले लेते आना।
.
तभी उन्हें सड़क किनारे बड़े और ताज़ा केले बेचते हुए

एक बीमार सी दिखने वाली बुढ़िया दिख गयी।
.
वैसे तो वह फल हमेशा "राम आसरे फ्रूट भण्डार" से

ही लेते थे,
पर आज उन्हें लगा कि क्यों न

बुढ़िया से ही खरीद लूँ ?
.
उन्होंने बुढ़िया से पूछा, "माई, केले कैसे दिए"
.
बुढ़िया बोली, बाबूजी बीस रूपये दर्जन,

शर्माजी बोले, माई १५ रूपये दूंगा।
.
बुढ़िया ने कहा, अट्ठारह रूपये दे देना,

दो पैसे मै भी कमा लूंगी।
.
शर्मा जी बोले, १५ रूपये लेने हैं तो बोल,

बुझे चेहरे से बुढ़िया ने,"न" मे गर्दन हिला दी।
.
शर्माजी बिना कुछ कहे चल पड़े

और राम आसरे फ्रूट भण्डार पर आकर

केले का भाव पूछा तो वह बोला २४ रूपये दर्जन हैं
.
बाबूजी, कितने दर्जन दूँ ?

शर्माजी बोले, ५ साल से फल तुमसे ही ले रहा हूँ, 

ठीक भाव लगाओ।
.
तो उसने सामने लगे बोर्ड की ओर इशारा कर दिया।

बोर्ड पर लिखा था- "मोल भाव करने वाले माफ़ करें"

शर्माजी को उसका यह व्यवहार बहुत बुरा लगा,

उन्होंने कुछ  सोचकर स्कूटर को वापस

ऑफिस की ओर मोड़ दिया।
.
सोचते सोचते वह बुढ़िया के पास पहुँच गए।

बुढ़िया ने उन्हें पहचान लिया और बोली,
.
"बाबूजी केले दे दूँ, पर भाव १८ रूपये से कम नही लगाउंगी।

शर्माजी ने मुस्कराकर कहा,

माई एक  नही दो दर्जन दे दो और भाव की चिंता मत करो।
.
बुढ़िया का चेहरा ख़ुशी से दमकने लगा।

केले देते हुए बोली। बाबूजी मेरे पास थैली नही है ।

फिर बोली, एक टाइम था जब मेरा आदमी जिन्दा था
.
तो मेरी भी छोटी सी दुकान थी।

सब्ज़ी, फल सब बिकता था उस पर।

आदमी की बीमारी मे दुकान चली गयी,

आदमी भी नही रहा। अब खाने के भी लाले पड़े हैं।

किसी तरह पेट पाल रही हूँ। कोई औलाद भी नही है
.
जिसकी ओर मदद के लिए देखूं।

इतना कहते कहते बुढ़िया रुआंसी हो गयी,

और उसकी आंखों मे आंसू आ गए ।
.
शर्माजी ने ५० रूपये का नोट बुढ़िया को दिया तो

वो बोली "बाबूजी मेरे पास छुट्टे नही हैं।
.
शर्माजी बोले "माई चिंता मत करो, रख लो,

अब मै तुमसे ही फल खरीदूंगा,
और कल मै तुम्हें ५०० रूपये दूंगा।

धीरे धीरे चुका देना और परसों से बेचने के लिए

मंडी से दूसरे फल भी ले आना।
.
बुढ़िया कुछ कह पाती उसके पहले ही

शर्माजी घर की ओर रवाना हो गए।

घर पहुंचकर उन्होंने पत्नी से कहा,

न जाने क्यों हम हमेशा मुश्किल से

पेट पालने वाले, थड़ी लगा कर सामान बेचने वालों से

मोल भाव करते हैं किन्तु बड़ी दुकानों पर

मुंह मांगे पैसे दे आते हैं।
.
शायद हमारी मानसिकता ही बिगड़ गयी है।

गुणवत्ता के स्थान पर हम चकाचौंध पर

अधिक ध्यान देने लगे हैं।
.
अगले दिन शर्माजी ने बुढ़िया को ५०० रूपये देते हुए कहा,

"माई लौटाने की चिंता मत करना।

जो फल खरीदूंगा, उनकी कीमत से ही चुक जाएंगे।

जब शर्माजी ने ऑफिस मे ये किस्सा बताया तो

सबने बुढ़िया से ही फल खरीदना प्रारम्भ कर दिया।

तीन महीने बाद ऑफिस के लोगों ने स्टाफ क्लब की ओर से

बुढ़िया को एक हाथ ठेला भेंट कर दिया।

बुढ़िया अब बहुत खुश है।

उचित खान पान के कारण उसका स्वास्थ्य भी

पहले से बहुत अच्छा है ।

हर दिन शर्माजी और ऑफिस के

दूसरे लोगों को दुआ देती नही थकती।
.
शर्माजी के मन में भी अपनी बदली सोच और

एक असहाय निर्बल महिला की सहायता करने की संतुष्टि का भाव रहता है..!

जीवन मे किसी बेसहारा की मदद करके देखो यारों,

अपनी पूरी जिंदगी मे किये गए सभी कार्यों से

ज्यादा संतोष मिलेगा...!!
😊😊

नोट: - यदि लेख अच्छा लगे तो लिंक जरूर शेयर करें...
सोच को बदलो जिंदगी जीने का नजरिया बदल जायेगा। 😇😇

Wednesday, 20 May 2015

आकाश मिसाइल

सेना में शामिल हुई 'आकाश' मिसाइल
5 May, 2015
देसी तकनीक, रक्षा वैज्ञानिकों की तीस साल
की मेहनत आकाश को जमीन पर उतार लाई. जमीन
से आसमान पर मार करने वाली मिसाइल 'आकाश '
की पहली रेजिमेंट मंगलवार को भारतीय सेना के
हवाले कर दी गई.
पूरी तरह से देसी तकनीक से बनी ये मिसाइल किसी
भी तरह के मौसम में दुश्मनों के लड़ाकू विमान पर
हमला कर उसके परखच्चे उड़ा सकती है. देसी तकनीक
से बनी इस आकाश वेपन सिस्टम की पूरी प्रणाली
जबरदस्त है. इस मिसाइल की रेंज 25 किलोमीटर तक
की है. वजन 720 किलोग्राम और लंबाई पौने छह
मीटर है. ये मिसाइल 30 मीटर से 20 किलोमीटर
ऊंचाई तक के निशाने पर अचूक वार करती है. दुश्मन
लड़ाकू विमान उड़ाए, हेलिकॉप्टर उड़ाए या फिर
मानव रहित ड्रोन, इसकी मार से कोई नहीं बच
सकता.
'आकाश' की संचार व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित और
अभेद्य है. सबसे जरूरी इसका अपना ऑटोमेटेड
इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम है. डीआरडीओ, बीडीएल
और सेना की अन्य एजेंसियों के वैज्ञानिकों की
तीन दशकों की मेहनत से तैयार इस आकाश वेपन
सिस्टम में सबसे पहले थ्री डी सेंट्रल एक्विजिशन
रडार सौ किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के विमान की
टोह ले लेते हैं. ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम को फौरन
इसकी जानकारी दी जाती है. 3 से 10 सेकेंड के बीच
मिसाइलों को अलर्ट कर दिया जाता है. इंतजार शुरू
होता है दुश्मन के विमान के 25 किलोमीटर के रेंज में
आने का और जैसे ही दुश्मन का विमान रेंज में आया
वैसे ही 'आकाश' मिसाइल उसे नेस्तनाबूत कर देगी.
आकाश वेपन सिस्टम की पहली खेप भारतीय सेना
को सौंप दी गई है. जल्दी ही सीमावर्ती इलाकों में
इसकी तैनाती भी हो जाएगी. इसके साथ ही
भारतीय सेना ने आत्म सुरक्षा की ओर
आत्मविश्वास से भरा एक और कदम बढ़ा दिया है.

Wednesday, 13 May 2015

भारत का प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम India’s Missile Development Program

5 घोषित परमाणु राज्यों (चीन,
ब्रिटेन, फ़्रांस, रूस, और संयुक्त
राज्य अमेरिका) के बाद, भारत
के पास सबसे उन्नत मिसाइल
कार्यक्रमों में से एक है| भारत
अपने परिष्कृत मिसाइल और
अंतरिक्ष कार्यक्रमों के साथ,
देश में ही लंबी दूरी की परमाणु
मिसाइलों के विकास में
तकनीकी रूप से सक्षम है।
बैलिस्टिक मिसाइलों में भारत
का अनुसंधान 1960 के दशक में शुरू
हुआ। जुलाई 1983 में भारत ने
स्वदेशी मिसाइल के बुनियादी
ढांचे को विकसित करने के
उद्देश्य के साथ समन्वित
निर्देशित प्रक्षेपास्त्र
विकास कार्यक्रम (Integrated
Guided Missile Development
Program- IGMDP) शुरुआत की।
आईजीएमडीपी द्वारा देश में ही
विकसित सबसे पहली मिसाइल
पृथ्वी (पृथ्वी) थी। भारत की
दूसरी बैलिस्टिक मिसाइल
प्रणाली, अग्नि (आग)
मिसाइलों की श्रृंखला है,
जिसकी मारक क्षमता पृथ्वी
मिसाइलों से ज्यादा है, साथ
ही अग्नि मिसाइलों से अधिक
उन्नत भी है|
भारत की विभिन्न मिसाइलें
उसकी सुरक्षा प्रणाली का बेहद
अहम हिस्सा है| अग्नि मिसाइलें
भारतीय मिसाइल प्रणाली की
रीढ़ हैं| भारत की कुछ प्रमुख
मिसाइलें इस प्रकार हैं-
बैलिस्टिक मिसाइल Ballistic
Missiles
पृथ्वी मिसाइल प्रणाली
Prithvi missile system
भारत में सबसे पहले छोटी दूरी के
लिए पृथ्वी मिसाइलों का
विकास शुरू किया| इन
मिसाइलों का विकास 1983 में
हैदराबाद में शुरू किया गया और
इसका पहला परीक्षण
श्रीहरिकोटा, शार केंद्र
(SHAR-‘Sriharikota Range’ now
‘Satish Dhawan Space Centre’)
नेल्लोर जिले, आंध्र प्रदेश से 25
फ़रवरी 1988 को किया गया|
पृथ्वी-1 भारत में विकसित
स्वदेशी तकनीकी से बनी
बैलिस्टिक मिसाइल थी,
जिसकी क्षमता 150 किमी.
थी| पृथ्वी मिसाइलों के कई
संस्करण हैं- जिनमे पहला था
SS-150 या P1 , जिसकी
क्षमता 150 किमी. है| दूसरा
संस्करण SS-250 या P2 है,
जिसकी क्षमता 250 किमी.
तक है| 350 किमी तक मारक
क्षमता वाली पृथ्वी-III
मिसाइलों का परीक्षण सन
2004 में किया गया| पृथ्वी-1
मिसाइलों का प्रयोग भारतीय
थल सेना द्वारा किया जाता
रहा, और पृथ्वी-II मिसाइलों
का प्रयोग भारतीय वायुसेना
द्वारा किया जाता है| पृथ्वी
मिसाइलों के नौसैनिक संस्करण
को धनुष (Dhanush) मिसाइल के
नाम से भी जाना जाता है| जो
पृथ्वी-1 और पृथ्वी-2 मिसाइलों
का ही विकसित रूप है| वास्तव
में पृथ्वी मिसाइलों का विकास
नाभिकीय अस्त्र लि जाने के
लिए किया गया था, परन्तु
अधिक उन्नत अग्नि मिसाइलों
के सफल परीक्षण के बाद इन
मिसाइलो पर नाभिकीय
अस्त्रों की आवश्यकता नहीं रह
गयी| धनुष मिसाइलों का
पनडुब्बी संस्करण भी विकसित
करने के प्रयास किया जा रहा
है|
पृथ्वी-I व पृथ्वी-II मिसाइलें
तरल ईंधनों से युक्त थीं| पृथ्वी-III
मिसाइलें एक चरण वाले ठोस
ईंधनो से युक्त होती हैं, जिससे ये
मिसाइलें विभिन्न स्थानों और
परिस्थितियों में बहुत ही कम
समय में तैयार करके दागी जा
सकती हैं| पृथ्वी-1 मिसाइलें
1994 में भारतीय सेना में
शामिल की गयीं, जिनका
संचालन सिकंदराबाद में भारतीय
सेना के 333वें मिसाइल समूह
द्वारा किया जाता रहा|
444वें मिसाइल समूह की
स्थापना मई 2002 में की गयी
जो पृथ्वी और अग्नि- 1
मिसाइलों के संचालन की देख-
रेख करता है|
पृथ्वी मिसाइलों SS-150 का
उत्पादन 1993 में शुरू हुआ, और
1999 तक लगभग 60 मिसाइलें
बनायीं गयीं| इनके प्रक्षेपण के
लिए 35 प्रक्षेपण वाहनों
(transport erector launcher-
TEL) का भी निर्माण किया
गया|
पृथ्वी-II या SS-250 को
भारतीय वायु सेना में 1999 में
शामिल किया गया और आक
अनुमान के अनुसार लगभग 70
मिसाइलों का निर्माण किया
गया| बाद में इनका नियंत्रण,
मिसाइल संचालन करने वाले थल
सेना के समूह को दे दिया गया,
जो अपने लक्ष्यों के लिए
वायुसेना के संपर्क में रहता है|
पृथ्वी-III मिसाइलों परीक्षण
नवम्बर 1993 और अप्रैल 2001 में
किया गया, परन्तु अभी यह
निश्चित नहीं है की इनका
विकास आगे किया जा रहा है
या नहीं|
युद्ध-पोतों से प्रक्षेपित की जा
सकने वाली पृथ्वी मिसाइलों के
नौसैनिक संस्करण धनुष का
परीक्षण आई.एन.एस. सुभद्रा से
अप्रैल 2000 में किया गया| यह
परीक्षण असफल रहा| इसके दूसरे
परीक्षण दिसम्बर 2000 और
सितम्बर 2001 में किये गए,
जिसमे इन मिसाइलों ने 150
किमी. की निर्धारित दूरी तय
की|
पृथ्वी मिसाइलें सभी प्रकार
के पारंपरिक और सामरिक
हथियार ले जाने में सक्षम हैं|
मिसाइल पेलोड क्षमता
(दूरी)
पृथ्वी-I 1000
किग्रा.,
सभी
प्रकार के
हथियार
के जाने में
सक्षम
150
पृथ्वी-II 350-750
किग्रा.,
सभी
प्रकार के
हथियार
के जाने में
सक्षम
250-350
पृथ्वी-III 500-1000
किग्रा.,
सभी
प्रकार के
हथियार
के जाने में
सक्षम
350-600
अग्नि मिसाइल प्रणाली
Agni missile system
भारत ने मध्यम दूरी की, सतह से
सतह पर मार करने वाली, अग्नि
मिसाइल प्रणाली पर 1979 में
कम शुरू किया और इनका पहला
परीक्षण 1989 में किया गया|
परन्तु उत्तरोत्तर सरकारों ने
अन्तर्राष्ट्रीय दबावों में इसके
अगले परीक्षण नहीं किये| अग्नि
-1 का परीक्षण 1990 के मध्य में
किया गया, और इसे
प्रौद्योगिकी का विकास
(technology demonstrator)
बताया गया| 1998 में
प्रधानमंत्री अटल बिहारी
बाजपेयी की अगुवाई वाली
सरकार ने अग्नि मिसाइलों के
विकास को नई दिशा दी| इस
प्रकार 1999 में अग्नि –II का
परीक्षण किया गया, और सन
2002 में अग्नि-I का भी
परीक्षण किया गया| अग्नि
मिसाइलें अंतरवर्ती दूरी
(Intermediate-Range Ballistic
Missile-IRBM) तक प्रहार करने
वाला बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र
है| इसमें मुख्य रूप से ठोस
प्रणोंदकों का ही इस्तेमाल
होता है (SLV-3 के समान)|
अग्नि मिसाइलों का ताप
परिरक्षक (Heat Shield) कार्बन
सम्मिश्रणों (composite) का
बना होता है, जिसके कारण ये
उच्च तापमान लगभग 5000°C,
को भी सहन कर सकती हैं|
अमेरिका, रूस, फ़्रांस, इजराइल
और चीन के बाद भारत ऐसी
प्रणाली विकसित करने वाला
6वां देश है|
अग्नि-1 Agni – I
कम दूरी के लिए अग्नि-I का
विकास 1999 में शुरू हुआ| यह
1990 में परीक्षण की गयी
अग्नि मिसाइलों पर ही
आधारित था| अपने पेलोड के
साथ इसकी मारक क्षमता 1200
किमी. तक है| अग्नि-I का
विकास कम समय में परमाणु
क्षमता प्रदान करने के लिए
किया गया है| परमाणु क्षमता
संपन्न अग्नि – 1 प्रक्षेपास्त्र
का ताजा परीक्षण 25 नवंबर
2010 एवं दिसंबर 2011 में किया
गया| अग्नि – 1 को पहले ही
भारतीय सेना में शामिल कर
लिया गया है लेकिन सेना से जुड़े
लोगों के प्रशिक्षण और उनकी
कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए
इसका समय-समय पर प्रायोगिक
परीक्षण किया जाता है|
अग्नि-2 Agni – II
2000 किमी. की मारक क्षमता
वाली अग्नि – II मिसाइलों
का सबसे पहले परीक्षण अप्रैल
1999 में किया गया था| 2009 में
इनका दो बार परीक्षण असफल
हो गया था| मई 2010 में इसका
सफल परीक्षण किया गया| ये
एक टन तक का पेलोड ले जा
सकती है| सितंबर 2011 में एक
बार फिर अग्नि-2 का सफल
परीक्षण किया गया. अग्नि-2
भारतीय सेना में शामिल की
जा चुकी है|
अग्नि-3 Agni – III
3500 किमी. की मारक क्षमता
वाली, और 1.5 टन तक का
पेलोड लि जा सकने में सक्षम
अग्नि-3 मिसाइलों को 2006 में
परीक्षण किया जिसे आंशिक रूप
से ही सफल बताया गया| 2007
और 2008 में अग्नि-3 का सफल
प्रशेपण किया गया| अग्नि-3
का चौथा परीक्षण फरवरी
2010 में उड़ीसा के पास व्हीलर
आईलैंड में किया गया|
अग्नि – 4 Agni – IV
3000 किमी. से अधिक मारक
क्षमता, 1000 किग्रा. से अधिक
पेलोड ले जाने में सक्षम अग्नि-4
मिसाइलों का सफल प्रक्षेपण
नवंबर 2011 में किया गया| ये
मिसाइलें अपने पूर्ववर्ती
संस्करणों से हल्की, परन्तु
तकनीकी रूप से अधिक उन्नत हैं|
इनका पहला परीक्षण दिसम्बर
2010 में हुआ था, परन्तु तकनीकी
कारणों से ये परीक्षण असफल
रहा था| अग्नि-3 मिसाइलें
अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक
मिसाइल (intercontinental
ballistic missile, ICBM) हैं|
अग्नि मिसाइलें सभी प्रकार के
पारंपरिक और सामरिक हथियार
ले जाने में सक्षम हैं| नई तकनीकों
जैसे अति आधुनिक कम्प्यूटर और
नेवीगेशन सिस्टम के इस्तेमाल के
कारण ये मिसाइलें अचूक हैं|
अग्नि मिसाइलों की श्रृंखला
को डीआरडीओ (Defense
Research and Development
Organization, DRDO) द्वारा
विकसित किया गया है और
भारत डायनामिक्स लिमिटेड
(Bharat Dynamics Limited)
द्वारा इनका निर्माण किया
जाता है|
अग्नि -5 Agni – V
भारत ने अपनी पहली
अंतरमहाद्वीपीय दूरी की
बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5
का परीक्षण अप्रैल 2012 में
किया| 5000-8000 किमी की
मारक क्षमता वाली इस
मिसाइल को भी MIRV के रूप में
विकसित किया गया है, जो एक
बार में 3 से ज्यादा हथियारों
को ले जाने में सक्षम है|
अग्नि-6 Agni-VI
इनके आलावा अग्नि-VI का
विकास, 2008 में
आईजीएमडीपी कार्यक्रम के
समाप्त होने के बाद,
डीआरडीओ द्वारा किए गए
नीति में परिवर्तन के अनुसार
स्वतंत्र परियोजनाओं के तहत
किया जा रहा है| अग्नि-VI
को भी मल्टीपल इंडिपेंडिबल
री- एंट्री व्हीकल यानी
एमआईआरवी (Multiple
independently targetable
reentry vehicle-MIRV) के रूप में
विकसित करने के प्रयास किये
जा रहें हैं, जो एक बार में 4-6
हथियार ले जाने में सक्षम
होगा|
मिसाइल पेलोड क्षमता
(दूरी)
अग्नि-1 1000, सभी
प्रकार के
हथियार ले
जाने में
सक्षम
700-12
अग्नि-2 750-1000,
सभी
प्रकार के
हथियार ले
जाने में
सक्षम
2000-3
अग्नि-3 2000-2500,
सभी
प्रकार के
हथियार ले
जाने में
सक्षम
3500-5
अग्नि-4 800-1000,
सभी
प्रकार के
हथियार ले
जाने में
सक्षम
3000-4
अग्नि-5 1500, सभी
प्रकार के
हथियार ले
जाने में
सक्षम,
विकास के
अंतर्गत
5500-5
अग्नि-6 1000, सभी
प्रकार के
हथियार ले
जाने में
सक्षम,
विकास के
अंतर्गत
6000-8
त्रिशूल मिसाइल प्रणाली
Trishul Missile System
त्रिशूल मिसाइल सतह से हवा में
मार करने वाली पहला स्वदेशी
सक्षम प्रक्षेपास्त्र है| इसे सेना के
तीनो अंग प्रयोग कर सकते हैं|
इसकी मारक क्षमता 500 मी. से
लेकर 12 किमी. तक है| यह 5.5
किग्रा. तक के विस्फोटकों को
के जा सकती है, इलेक्ट्रॉनिक
संसूचकों (detector) की मदद से
लक्ष्य के करीब इनमे विस्फोट
होता है| इनमे ठोस प्रणोदकों
का इस्तेमाल होता है| भारत ने
आधिकारिक तौर पर 27 फ़रवरी
2008 के बाद त्रिशूल मिसाइल
परियोजना बंद कर दी, परन्तु
तकनीकी दक्षता हासिल करने
के लिए इसका परीक्षण किया
जा सकता है|
धनुष मिसाइल Dhanush
Missile
पृथ्वी और अग्नि मिसाइल की
सफलता के बाद भारतीय
वैज्ञानिकों ने समुद्र से सतह पर
प्रहार करने वाली धनुष मिसाइल
को विकसित किया| यह
मिसाइल पृथ्वी मिसाइल का
ही नौसैनिक संस्करण है| इसे
डीआरडीओ ने विकसित किया
है और निर्माण भारत
डाइनेमिक्स लिमिटिड द्वारा
इसका निर्माण किया जाता है|
यह 500 किग्रा. तक के पेलोड ले
जाने में सक्षम है|
आकाश मिसाइल प्रणाली
Akash missile system
सतह से हवा में मार करने में सक्षम
आकाश मिसाइलें माध्यम दूरी के
प्रक्षेपास्त्र हैं, जिनकी मारक
क्षमता 25-30 किमी. है|
आकाश मिसाइलें 2.5 मैक की
पराध्वनिक रफ़्तार पर उडती हैं|
ये 18 किमी. तक की ऊंचाई तक
भी जा सकती हैं| अक्सः
मिसाइलें 55 किग्रा. तक के
वॉरहेड्स का वहन कर सकती हैं| ये
मिसाइलें रैमजेट तकनीक पर
आधारित हैं| इनमे दो चरणों वाले
ठोस प्रणोदकों का इस्तेमाल
होता है| आकाश मिसाइलें देश में
ही विकसित राजेन्द्र राडार से
एकीकृत होती हैं, जिनके द्वारा
इन्हें निर्देश दिया जाता है| इस
मिसाइलों का पूर्ण रूप से राडार
द्वारा ही नियंत्रण किया
जाता है|
आकाश मिसाइलों का विकास
1990 में शुरू किया गया था और
इनका पहला परीक्षण मार्च
1997 में किया गया था|
नाग मिसाइल Nag Missile
दागो और भूल जाओ (Fire-
and-forget) के सिद्धांत पर
विकसित नाग मिसाइल एक टैंक
रोधी (anti-tank missile) है,
जिसकी क्षमता 3-7 किमी है|
इसमें ठोस प्रणोदकों का
इस्तेमाल होता है| नाग
मिसाइलों में अवरक्त प्रतिविम्ब
प्रणाली (Imaging Infra-Red,
IIR) का प्रयोग किया जाता है,
जिसके कारन दिन और रात
दोनों समय इससे अचूक निशाना
लगाया जा सकता है| नाग
मिसाइलों का हेलीकाप्टर में
प्रयोग किया जा सकने वाला
संस्करण भी विकसित किया
जा चुका है, जिसे हेलिना
(HELINA - HELIcopter NAg) के
नाम से जाना जाता है| इसे HAL
द्वारा विकसित ध्रुव
हेलीकाप्टरों में लगाया गया है|
इन मिसाइलों के प्रक्षेपण के
लिए एक थर्मल इमेजर से लैस
विशेष वाहन नामिका
(NAMICA-Nag Missile Carrier)
का भी विकास किया गया है|
पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट
लांचर Pinaka Multi Barrel
Rocket Launcher
पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट
प्रणाली को जिसे भारतीय
सेना के लिए रक्षा अनुसंधान एवं
विकास संगठन (डीआरडीओ)
द्वारा विकसित किया गया है|
ये प्रणाली अधिकतम 40-65
किमी. तक के पाने लक्ष्यों को
भेद सकती है| इस प्रणाली से 44
सेकंड में 72 रॉकेट दागे जा सकते
हैं, जो 4 वर्ग किमी. के क्षेत्र
को तबाह कर सकते हैं| इसके अलग-
अलग राकेटों को अलग-अलग
दिशा में भी दागा जा सकता
है| इस प्रणाली की गतिशीलता
के लिए इसे एक टाट्रा (Tatra)
ट्रक पर लगाया जाता है|
पिनाका मिसाइल प्रणाली
का विकास 1986 में शुरू हुआ था
और दिसम्बर 1992 में इस पर काम
पूरा हुआ|
निर्भय मिसाइल Nirbhay
Missile
17 अक्टूबर, 2014 को भारत ने
DRDO द्वारा स्वदेशी तकनीकी
से विकसित देश की पहली
अध्वनिक (subsonic) मिसाइल
निर्भय का परीक्षण किया|
टर्बोजेट इंजन और ठोस
प्रणोदकों पर आधारित इस
मिसाइल की रफ़्तार 0.65 मैक है|
यह मिसाइल 450 किग्रा. तक के
पेलोड के साथ 800-1000 किमी.
की दूरी तक मार करने में सक्षम
है| इस मिसाइल में एक खास तरह
का फायर एंड फोरगेट सिस्टम
लगा है, जिसे जाम नहीं किया
जा सकता। यह मिसाइल उच्च
तकनीक पर आधारित है, इसे
सामान्य मिसाइलों की तरह ही
प्रक्षेपित किया जाता है,
लेकिन एक निश्चित ऊंचाई पर
पहुँचने के बाद इसमें लगे पंख खुल
जाते हैं, और यह एक विमान की
तरह काम करने लगती है|
निर्भय मिसाइल कई विशेषताओं
से युक्त है, जैसे यह कम ऊंचाई पर
उडती है जिसकी वजह से यस
राडार के पकड़ में आसानी से
नहीं आती| इसे दूर से नियंत्रित
किया जा सकता है, लक्ष्य के
पास पहुँचाने के बाद ये उसके इर्द-
गिर्द चक्कर लगा सकती है और
सटीक मौके पर हमला कर सकती
है| ये मिसाइलें काफी कुशल हैं,
जिन्हें भिन्न-भिन्न पेलोड के
साथ विभिन्न प्लेटफार्म से
प्रक्षेपित किया जा सकता है|
इस मिसाइल को प्रमुख तौर पर
वायु सेना और नौसेना के लिए
विकसित करने की योजना है|
प्रहार मिसाइल Prahaar
Missile
प्रहार कम दूरी की (Short-
Range Ballistic Missile, SRBM)
बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे
तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिया
विकसित किया गया है| यह
मिसाइल 250 सेकेंड के भीतर,
150 किमी की दूरी तक अपने
लक्ष्यों को भेद सकती है| इस नई
मिसाइल से वर्तमान मल्टी बैरल
रॉकेट प्रणाली वाली पिनाका
और परमाणु सामग्री ले जाने में
सक्षम पृथ्वी मिसाइलों के बीच
के अंतर को दूर किया जा
सकेगा। पिनाका 40
किलोमीटर तक जबकि पृथ्वी
350 किलोमीटर तक के लक्ष्य
को भेद सकती है। एक चरण वाले
ठोस ईंधनों से युक्त यह मिसाइल
200 किग्रा. तक का पेलोड ले
जा सकने में सक्षम है| इस
मिसाइल का पहला परीक्षण
जुलाई 2011 में किया गया था|
शौर्य मिसाइल Shaurya
Missile
सतह से सतह पर वार करने में सक्षम
मध्यम दूरी की मारक क्षमता
वाली बैलिस्टिक मिसाइल
‘शौर्य’ का सफलतापूर्वक
परीक्षण सितम्बर 2011 में
किया गया था| इस मिसाइल
का पहला परीक्षण 2004 में
किया गया था| शौर्य
मिसाइलों की मारक क्षमता
700 किमी. है| दो चरणों वाले
ठोस प्रणोदकों से युक्त यह
मिसाइल 500-800 किग्रा. तक
का पेलोड ले जा सकती है| यह
मिसाइल जमीन के अलावा
पानी के भीतर से भी छोड़ी
जा सकती है|
सागरिका मिसाइल Sagarika
(K-15) Missile
भारत ने समुद्र से प्रक्षेपित की
जा सकने वाली बैलिस्टिक
मिसाइल (Sea Launched
Ballistic Missile, SLBM) का
भी विकास किया है|
सागरिका का परीक्षण 2008 में
किया गया था| DRDO द्वारा
विकसित यह मिसाइल 500-800
किग्रा. के पेलोड के साथ 700
किमी. की दूरी तक के लक्ष्यों
को निशाना बना सकती है|
इसमें दो चरणों वाले ठोस
प्रणोदकों का इस्तेमाल होता
है| शौर्य मिसाइल इसका
जमीनी संस्करण ही है|
सूर्य मिसाइल Surya Missile
भारत एक अंतर-महाद्वीपीय दूरी
की बैलिस्टिक मिसाइल
(Intercontinental Range
Ballistic Missile-IRBM)
विकसित करने का प्रयास कर
रहा है, जो एक MIRV मिसाइल
होगी| यह मिसाइल 2500
किमी. के पेलोड के साथ
8000-10000 किमी. की दूरी
तक लक्ष्यों को भेदने में सक्षम
होगी| इसका पहला परीक्षण
2015 में होने की सम्भावना है|
ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र BrahMos
Missile (PJ-10)
ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस
के द्वारा विकसित की गयी
पराध्वनिक (supersonic)
मिसाइल है| यह अब तक की सबसे
आधुनिक मिसाइल प्रणाली है,
जिसने भारत को मिसाइल
तकनीक में अग्रणी देश बना
दिया है| इसकी गति और
सटीकता के कारण, ब्रह्मोस को
सबसे दुर्जेय क्रूज मिसाइलों में से
एक माना जाता है। 12 फरवरी
1998 को भारत में डीआरडीओ
और रूस के एनपीओ
मशीनोस्त्रोयेनिशिया (DRDO
and Mashinostroyenia-NPOM)
के बीच एक समझौता हुआ और
ब्रह्मोस एयरोस्पेस (BrahMos
Aerospace) का गठन किया
गया| ब्रह्मोस नाम भारत की
ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा
( Bra hmaputra and Moscow)
नदी पर रखा गया है। इस सयुंक्त
उपक्रम का उद्देश्य था विश्व के
सबसे पसले सुपरसोनिक
मिसाइलों को विकसित करना
और बेचना|
डीआरडीओ के डा. ए.
शिवथानु पिल्लई (Dr. A.
Shivathanu Pillai) और एनपीओ
के डॉ. हर्बर्ट येफ्रेमोव (Dr.
Herbert Yefremov) ने इस
मिसाइल को विकसित करने में
अहम् भूमिका निभाई|
ब्रह्मोस मिसाइल का पहला
परीक्षण 12 जून 2001 को,
उड़ीसा तटीय क्षेत्र में चाँदीपुर
के एकीकृत परीक्षण स्थल
(Interim Test Range off
The Chandipur coast in Orissa
– ITR) से किया गया| अब तक
इसके कई संस्करण विकसित किये
जा चुके हैं| रैमजेट तकनीक पर
आधारित ब्रह्मोस सुपरसोनिक
मिसाइल 200-300 किग्रा
पेलोड के साथ 300 किमी. की
दूरी पर अपने लक्ष्यों को भेद
सकती है| इस मिसाइल को
जमीन से, हवा से, पनडुब्बियों से,
युद्ध पोतो से अर्थात कहीं से
भी प्रक्षेपित किया जा सकता
है| ब्रह्मोस के मेनुवरेबल संस्करण
का भी परीक्षण किया जा
चुका है, जिससे प्रक्षेपित किये
जाने के बाद अपने लक्ष्य तक
पहुँचने से पहले ही इसका मार्ग
बदला जा सकता है|
भारत की भविष्य में ब्रह्मोस-2
नाम से हाइपर सोनिक
मिसाइल मिसाइल बनाने की
भी योजना है, जो 7 मैक की
गति से अपने लक्ष्यों को भेदने में
सक्षम होगी| इस मिसाइल का
विकास भारत को बिना रूस
की सहायता से अपने दम पर
करना होगा, क्योंकि रूस ने
अंतरराष्ट्रीय मिसाइल तकनीक
नियंत्रण संधि (Missile
Technology Control Regime-
MTCR) पर हस्ताक्षर किये हैं,
जिसके कारण वह 300 किमी से
अधिक मारक क्षमता वाली
मिसाइल के विकास में अन्य
देशों को मदद नहीं दे सकता है।
ब्रह्मोस मिसाइलों को थल
सेना एवं नौसेना में शामिल
किया जा चुका