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Wednesday, 15 August 2018

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

आप सभी लोगों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं





💐जलती रही चिताएँ फिर सभी मौन थें । हमें पढ़ाया जाता है कि आजादी चरखे से आईं। फिर फाँसी पर झूलने वाले नौजवान कौन थें।💐

Tuesday, 27 June 2017

क्या यह हैं मोदी जी का विकल्प option modi

अगर आप जल्दी में हैं तो बाद मे जब आप फ़ुर्सत मे हो तब पढ लीजिएगा.किंतु पढना धैर्य और शांति से और तत्पश्चात निश्कर्ष निकालना.

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भारत में बहुत से लोग है,
जो भ्रष्ट नेताओं की बातों में आकर नरेन्द्र मोदी का विरोध करते है
अच्छा है,
 लोकतंत्र है विरोध करें या समर्थन ये तो आपका अपना हक है
पर मोदी का विरोध करके आप समर्थन किसका कर रहे हो ?ये बडा गंभीर सवाल है इसलिए निर्णय भी गंभीरता पूर्वक ही होना चाहिए .

*क्या मुलायम, लालू, मायावती, सोनिया,राहुल  केजरीवाल, ममता बनर्जी, वामपंथी
ये सब नरेन्द्र मोदी से बेहतर है ??
या इनका रिकॉर्ड बेहतर है ??

* क्या नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्रीकाल की तुलना मे ममता बनर्जी, नितिश .अखिलेश आदि बेहतर नजर आता है ?तुलना करनी है तो  गुजरात के किसी छोटे शहर मे जाकर 1 नजर मार लीजिये और फिर इन अन्य राज्यो की राजधानी का भ्रमण कीजिए .

* राजनीति मे प्रवेश के समय लालू और मुलायम,
 दोनों के घर की ऐसी स्तिथि थी की, 1 के घर पर साइकिल और एक के घर पर लालटेन खरीदने तक के पैसे नहीं थे,
जाति के नाम पर चलने वाले नेता, आज अरबपति है,
रामगोपाल चार्टर्ड प्लेन में घूमते है, तो शिवपाल महँगी ऑडी मे कहाँ से आया इतना अकुत धन ?ये लोग नरेन्द्र मोदी से
बेहतर है ?

*  सोनिया जी के बेटा-बेटी और दामाद आज सभी अरबपति है, 10 साल का  इनका राज हाल में ही  बीता है, क्या ये नरेन्द्र मोदी से बेहतर है ??

* 35 साल बंगाल में राज करने वाले वामपंथी, नरेन्द्र मोदी से बेहतर है ?

* 5 साल केजरीवाल, 5 साल केजरीवाल, का विज्ञापन चलाकर दिल्ली के लोगों को चुना लगाने वाला, WIFI, CCTV, 150 कॉलेज, 500 स्कुल क्या केजरीवाल नरेंद्र मोदी से बेहतर है ?

* जब मायावती राजनीती करने निकली थी, और कांशीराम की साथी थी, तब उसके घर में दिया जलाने का धन नहीं था, साईकल से प्रचार करती थीआज उसका सैंडल भी प्लेन से आता है, उसके भाई के पास सैकड़ो  कंपनिया है अरबों  रुपये का बैंक बैलेंस मिला है
, क्या मायावती नरेंद्र मोदी से बेहतर है ???

अरे मोदी का विरोध करने वालो, विरोध करो, पर समर्थन किसका करना है ये तो तय करो कोई बेहतर विकल्प हो तो बताना जरुर.

थोड़ा देश का भी सोचो, कितना बर्बाद करवाना है, कितना लूटवाना है ?अरे बाहर निकलो जातियो के बंधनो से इसे उबारकर ये लूटेरे हमे ही लूटते है.

 *****मान लो कि मैं मूर्ख हूँ और****...

● मुझे नहीं मालूम कि मैं मोदी जी को क्यों पसंद करता हु । लेकिन मेरे पास कांग्रेस , सपा ,बसपा , आप को नापसंद करने के बहुत कारण है ।

● मुझे नहीं मालूम कि अच्छे दिन आएंगे कि नहीं,
 पर मोदी जी के अतिरिक्त और कोई राजनेता दूर दूर तक दिखाई नहीं देता जो भारत के अच्छे दिनों के लिए तन और मन से प्रयत्न करता हो

● मुझे ये भी नहीं मालूम कि मोदी जी भारत को हिन्दू राष्ट्र बना पायेगे या नहीं । लेकिन, इसका पूरा यकीन हैं कि वो पूरी संजीदगी और गंभीरता से भारत माता को पुनः विश्वगुरु का दर्जा दिलवाने हेतु प्रयासरत है ।

● मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मोदी के पास 56 इंच का सीना हैं या नहीं। लेकिन ये पता हैं कि उनके सीने में 'दम' हैं 'दमा' नहीं।

● मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता अगर मोदी से देश के कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी नाराज हैं, क्यूंकि मुझे यकीन है उनके आने के बाद युवा पीढ़ी बहुत खुश है

● मुझे ज्ञात नहीं कि मोदी देश का कितना विकास कर पाएंगे, लेकिन मुझे यकीं है वो अपनी जिम्मेवारियां उठाने में कोई कसर बाकि नहीं रखेंगे।

● मुझे फर्क नहीं पड़ता कि मोदी जी के पास इतिहास की जानकारी हैं या नहीं। मुझे पक्का यकीन हैं उनके पास भविष्य की पूरी तैयारी है ।
▪अपने मुख्यमन्त्री काल में गुजरात मे मोदी ने
कोई भृष्टाचार घपला परिवार के किसी भी सदस्य के लिए कुछ भी गलत जमा या पक्षपात किया है ??

● हां वाकई मुझे नहीं पता कि भविष्य में बीजेपी हारेगी या जीतेगी पर देश का सजग नागरिक होने के नाते ये जरुर चाहता हूँ कि मेरा देश जीतना चाहिए.
                       जय हिंद

Saturday, 22 April 2017

हिन्दू धर्म की बेहद ही जरूरी बात

अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है।

33 करोड़ नहीं 33 कोटि देवी देवता हैं हिंदू धर्म में ;

कोटि = प्रकार ।
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते हैं ।

कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता है।

हिंदू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उड़ाई गयी की हिन्दूओं  के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...

कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिंदू  धर्म में :-

12 प्रकार हैँ :-
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,
शक्रा, वरुण, अँशभाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु...!

8 प्रकार हैं :-
वासु:, धरध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।

11 प्रकार हैं :-
रुद्र: ,हरबहुरुप, त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,
रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।
                       एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार ।

कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी

अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है ।
तो इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाएं ।

यह बहुत ही अच्छी जानकारी है इसे अधिक से अधिक लोगों में बाँटिये और इस कार्य के माध्यम से पुण्य के भागीदार बनिये ।

👉 एक हिंदू होने के नाते जानना आवश्यक है ।

🙏अब आपकी बारी है कि इस जानकारी को आगे बढ़ाए
📜अपने भारत की संस्कृति
को पहचानें।
ज्यादा से ज्यादा
लोगों तक पहुचायें।

खासकर अपने बच्चों को बताएं
क्योंकि ये बात उन्हें कोई दूसरा व्यक्ति नहीं बताएगा...

         📜😇  दो पक्ष-

कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष !

         📜😇  तीन ऋण -

देव ऋण ,
पितृ ऋण ,
ऋषि ऋण !

         📜😇   चार युग -

सतयुग ,
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग ,
कलियुग !

         📜😇  चार धाम -

द्वारिका ,
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी ,
रामेश्वरम धाम !

         📜😇   चारपीठ -

शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
शृंगेरीपीठ !

         📜😇 चार वेद-

ऋग्वेद ,
अथर्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद !

         📜😇  चार आश्रम -

ब्रह्मचर्य ,
गृहस्थ ,
वानप्रस्थ ,
संन्यास !

         📜😇 चार अंतःकरण -

मन ,
बुद्धि ,
चित्त ,
अहंकार !

         📜😇  पञ्च गव्य -

गाय का घी ,
दूध ,
दही ,
गोमूत्र ,
गोबर !

         📜

         📜😇 पंच तत्त्व -

पृथ्वी ,
जल ,
अग्नि ,
वायु ,
आकाश !

         📜😇  छह दर्शन -

वैशेषिक ,
न्याय ,
सांख्य ,
योग ,
पूर्व मिसांसा ,
दक्षिण मिसांसा !

         📜😇  सप्त ऋषि -

विश्वामित्र ,
जमदाग्नि ,
भरद्वाज ,
गौतम ,
अत्री ,
वशिष्ठ और कश्यप!

         📜😇  सप्त पुरी -

अयोध्या पुरी ,
मथुरा पुरी ,
माया पुरी ( हरिद्वार ) ,
काशी ,
कांची
( शिन कांची - विष्णु कांची ) ,
अवंतिका और
द्वारिका पुरी !

         📜😊  आठ योग -

यम ,
नियम ,
आसन ,
प्राणायाम ,
प्रत्याहार ,
धारणा ,
ध्यान एवं
समािध !

         📜

         📜

         📜😇   दस दिशाएं -

पूर्व ,
पश्चिम ,
उत्तर ,
दक्षिण ,
ईशान ,
नैऋत्य ,
वायव्य ,
अग्नि
आकाश एवं
पाताल

         📜😇 बारह मास -

चैत्र ,
वैशाख ,
ज्येष्ठ ,
अषाढ ,
श्रावण ,
भाद्रपद ,
अश्विन ,
कार्तिक ,
मार्गशीर्ष ,
पौष ,
माघ ,
फागुन !

         📜

         📜

         📜😇 पंद्रह तिथियाँ -

प्रतिपदा ,
द्वितीय ,
तृतीय ,
चतुर्थी ,
पंचमी ,
षष्ठी ,
सप्तमी ,
अष्टमी ,
नवमी ,
दशमी ,
एकादशी ,
द्वादशी ,
त्रयोदशी ,
चतुर्दशी ,
पूर्णिमा ,
अमावास्या !

         📜😇 स्मृतियां -

मनु ,
विष्णु ,
अत्री ,
हारीत ,
याज्ञवल्क्य ,
उशना ,
अंगीरा ,
यम ,
आपस्तम्ब ,
सर्वत ,
कात्यायन ,
ब्रहस्पति ,
पराशर ,
व्यास ,
शांख्य ,
लिखित ,
दक्ष ,
शातातप ,
वशिष्ठ !

**********************

इस पोस्ट के लिंक को अधिकाधिक शेयर करें जिससे सबको हमारी संस्कृति का ज्ञान हो।

Saturday, 15 April 2017

हर काम करने से पहले सोचे जरुर यह कहानी देखिये


एक युवक ने विवाह के दो साल बाद
परदेस जाकर व्यापार करने की
इच्छा पिता से कही ।

पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार करने चला गया ।

परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और वह धनी सेठ बन गया ।

सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए तो सन्तुष्टि हुई और वापस घर लौटने की इच्छा हुई ।

पत्नी को पत्र लिखकर आने की सूचना दी और जहाज में बैठ गया ।
उसे जहाज में एक व्यक्ति मिला जो दुखी मन से बैठा था ।

सेठ ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने बताया कि इस देश में ज्ञान की कोई कद्र नही है ।

मैं यहाँ ज्ञान के सूत्र बेचने आया था पर कोई लेने को तैयार नहीं है ।
सेठ ने सोचा ‘इस देश में मैने बहुत धन कमाया है,और यह मेरी कर्मभूमि है, इसका मान रखना चाहिए !’

उसने ज्ञान के सूत्र खरीदने की इच्छा जताई ।

उस व्यक्ति ने कहा-
मेरे हर ज्ञान सूत्र की कीमत 500 स्वर्ण मुद्राएं है ।

सेठ को सौदा तो महंगा लग रहा था..
लेकिन कर्मभूमि का मान रखने के लिए 500 स्वर्ण मुद्राएं दे दी ।

व्यक्ति ने ज्ञान का पहला सूत्र दिया-
कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट
रूककर सोच लेना ।

सेठ ने सूत्र अपनी किताब में लिख लिया ।

कई दिनों की यात्रा के बाद रात्रि के समय सेठ अपने नगर को पहुँचा ।

उसने सोचा इतने सालों बाद घर लौटा हूँ तो क्यों न चुपके से बिना खबर दिए सीधे पत्नी के पास पहुँच कर उसे आश्चर्य उपहार दूँ ।

घर के द्वारपालों को मौन रहने का इशारा करके सीधे अपने पत्नी के कक्ष में गया तो वहाँ का नजारा देखकर उसके पांवों के नीचे की जमीन खिसक गई ।

पलंग पर उसकी पत्नी के पास एक
युवक सोया हुआ था ।

अत्यंत क्रोध में सोचने लगा कि
मैं परदेस में भी इसकी चिंता करता रहा और ये यहां अन्य पुरुष के साथ है । दोनों को जिन्दा नही छोड़ूगाँ ।
क्रोध में तलवार निकाल ली ।

वार करने ही जा रहा था कि उतने में ही उसे 500 स्वर्ण मुद्राओं से प्राप्त ज्ञान सूत्र याद आया- कि कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट सोच लेना ।

सोचने के लिए रूका ।

तलवार पीछे खींची तो एक बर्तन से टकरा गई ।

बर्तन गिरा तो पत्नी की नींद खुल गई।

जैसे ही उसकी नजर अपने पति पर पड़ी वह ख़ुश हो गई और बोली:  आपके बिना जीवन सूना सूना था ।
इन्तजार में इतने वर्ष कैसे निकाले
यह मैं ही जानती हूँ ।

सेठ तो पलंग पर सोए पुरुष को
देखकर कुपित था ।

पत्नी ने युवक को उठाने के लिए कहा- बेटा जाग ।

तेरे पिता आए हैं ।

युवक उठकर जैसे ही पिता को प्रणाम
करने झुका माथे की पगड़ी गिर गई ।
उसके लम्बे बाल बिखर गए ।

सेठ की पत्नी ने कहा- स्वामी ये आपकी बेटी है ।

पिता के बिना इसके मान को कोई आंच न आए इसलिए मैंने इसे बचपन से ही पुत्र के समान ही पालन पोषण और संस्कार दिए हैं ।

यह सुनकर सेठ की आँखों से
अश्रुधारा बह निकली ।

पत्नी और बेटी को गले लगाकर
सोचने लगा कि यदि आज मैने उस ज्ञानसूत्र को नहीं अपनाया होता तो जल्दबाजी में कितना अनर्थ हो जाता ।

मेरे ही हाथों मेरा निर्दोष परिवार खत्म हो जाता ।

ज्ञान का यह सूत्र उस दिन तो मुझे महंगा लग रहा था लेकिन ऐसे सूत्र के लिए तो 500 स्वर्ण मुद्राएं बहुत कम हैं ।

‘ज्ञान तो अनमोल है ‘

इस कहानी का सार यह है कि
जीवन के दो मिनट जो दुःखों से बचाकर सुख की बरसात कर सकते हैं.

वे हैं – ‘क्रोध के दो मिनट’

इस कहानी को शेयर जरूर करें
क्योंकि आपका एक शेयर किसी व्यक्ति को उसके क्रोध पर अंकुश रखने के लिए  प्रेरित कर सक

Tuesday, 28 March 2017

यह खबर सिर्फ हिंदुओं के लिये


सनातनखबर स्रोत धर्म में LEATHER की चीजें प्रयोग करना साफ़ मना है। असल में LEATHER का उपयोग INDIAN ने कभी किया ही नहीं था। INDIA में सदियों से ही कपड़े की बनी चीजों का इस्तेमाल होता आया है। अब सवाल ये है कि INDIA में LEATHER आया कहां।
मध्यकालीन हिन्दुस्तान में जब MUSLIM भारत में आये तो वह लोग भारत के अन्दर LEATHER लेकर आये थे। बाद में भारत में आने के बाद कई स्वाभिमानी जातियों को नीचा दिखाने के लिए और जब कई जातियों ने इस्लाम स्वीकार नहीं किया गया तो इन जातियों से मरे पशुओं की खाल उतरवाकर, चमड़ा बनवाया गया था। खासकर गोचर्म को इस्लाम में परोक्ष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। सवाल आज के मुसलमान का नहीं है। क्योकि बुरे तो वो मुस्लिम थे जो विदेशी थे और इन्होनें ही भारत को बाँटने के लिए चमड़े और खासकर गाय के चमड़े पर जोर दिया था।
बगदाद के खलीफा ने अपने सेनापति मुहम्मद बिन कासिम को बैल की खाल में भरकर तीन दिनों तक कठोर यातना दी थी। आप कोई सनातन शास्त्र पढ़ लीजिये और इस तरह की सजा खोजिए। सनातन में पशु की खाल और उसके उपयोग जैसी चीजें मौजूद नहीं हैं। यह खाल और चमड़ा जैसी चीजें विदेशी मुसलमान भारत में लाये थे। मंदिरों को लुटने के लिए मंदिर के अन्दर गाय के खून को छिड़का जाता था. इस कार्य से हिन्दुओं की भावना को चोट पहुँचती थी। हिन्दुओं की आस्था पर ही चोट पहुंचाने के लिए गाय की खाल को उतारकर चमड़ा बनाया जाता था। प्रारंभ में कोई भी हिन्दू चमड़े का उपयोग नहीं करता था।
आप आज से कुछ 10 साल पहले चलें तो आपको याद आएगा कि आपके माता-पिता या दादा-दादी चमड़े के सामान आपको इस्तेमाल करने से मना करते होंगे। असल में पशुओं की हत्या करके ही या मरे पशुओं की खाल से चमड़ा बनता है और इसी का उपयोग हिन्दू बड़े शान के साथ करते हैं।
अच्छा आपने कभी यह सोचा है कि एक खास जानवर की खाल से चमड़ा क्यों नहीं बनाया जाता है? वह जानवर एक धर्म में हराम है. तो क्या उसकी खाल से चमड़ा क्या बन नहीं सकता है?
इसका जवाब यही है कि विदेशी MUSLIM ने उस जानवर को हाथ ही नहीं लगाया था। खासकर बात हो INDIAN की तो भारत में मरे पशु की SKIN से कभी कुछ नहीं बनाया गया था। यह LEATHER HINDU धर्म की चीज ही नहीं है। लेकिन जानकारी के अभाव में आज LEATHER की चीजें HINDU लोग बड़े गर्व के साथ इस्तेमाल कर रहे हैं।दुसरे

Sunday, 5 March 2017

यदुवंश का रहस्य (इतिहास) story yadav


आज जो बाते आपको बताने वाला हु वो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ।

कुछ लोग हमारे इतिहास से खिलवाड़ करके खुद को यदुवंश से जोड़नेका प्रयास कर रहे है वो तरह तरह की अफवाह फ़ेला रहे है इसके लिए अनेको तर्क देते है आज मै उनका सच आपको बताने जा रहा हु
1 कुछ लोग तर्क देते है कि वासुदेव (राजपूत)और नंदबाबा (यादव\अहीर) अलग अलग अलग जाति से थे जबकि सच ये है की दोनों क्षत्रिय यादव थे ।जबकि राजपूत शब्द तो 12वी शताब्दी तक कही भीअस्तित्व में ही नही था।
क्षत्रियों का प्रधान वंश यादव वंश है...यादव-कुल की एक अति-पवित्र शाखा ग्वालवंश है जिसका प्रतिनिधित्व नन्द बाबा करते थे .. .. बहुत से अज्ञानी दोनों को अलग -अलग वंश का बताते हैं....मूर्खों को ये मालूम नहीं की नन्द बाबा और कृष्ण के पिता वासुदेव रिश्ते में भाई थे जिसे हरिवंश पुराण में पूर्णतः स्पष्ट किया गया है....
भागवत पुराण में भी इस बात का जिक्र है.....ठीक इसी प्रकार वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी (बलराम जी की माता ) और माता यशोदा सगी बहने थी ।
ग्वालवंश में ही समस्त यादवों की कुल-देवी माँ विंध्यवासिनी देवी ने जन्म लिया था..
भागवत पुराण के अनुसार तो भगवान् श्रीकृष्ण के गोकुल प्रवास के दौरान सभी देवी-देवताओं ने ग्वालों के रूप में अंशावतार लिया था...
इसीलिए ग्वालवंशको अति-पवित्र माना जाता है।
2 कुछ महामूर्ख यादव और अहीर को भी अलग बताते है..अहि का अर्थ संस्कृत में सर्प होता है और अहीर का मतलब सर्प दमन होता है...ऋग वेद में राजा यदु का वर्णन है..इसीलिए उनके वंशज यादव-वैदिक क्षत्रिय है...ऋग वेद में महाराज यदु को वन में एकसांप को मारने की वजह से 'अहीर' की संज्ञा दी गयी है..बाद में कालिया नाग के दमन के पश्चात् श्रीकृष्ण को भी अहीर कहा गया .अहीर का अर्थ निर्भय भी होता है .
3 हरियाणा राज्य का नाम भी अहीरों के नाम पर पड़ा है पहले इसको अभिरयाणा बोला जाता था समय के साथ भाषा के बदलाव के कारण अहिराना - हीराना -हरियाणा हो गया ।
4 आज कल कुछ मुर्ख लोग बोल रही है श्री कृष्ण राजपूत है और ये खुद को यदुवंश से जोड़ने लगे इसके लिए तर्क देते है कि मथुरा Vrindavan और काफी जगह कृष्ण जी के साथ "ठाकुर" शब्द प्रयोग होता है इसलिए वो राजपूत है उन महामुर्खो को बता दू कि ठाकुर एक उपाधि है जिसका अर्थ होता है पालन करता ( जो गरीब और असहाय लोगो की सहयाता करता हो ) ये ठाकूर शब्द इसलिए ही प्रयोग होता है । और ठाकुर शब्द ठीक उसी प्रकार की उपाधि है जेसे चौधरी राव नम्बरदार मुखिया etc. ठाकुर मध्यप्रदेश में हरिजन जाती और up में नाई जाती भी प्रयोग करती है । वैसे भी महाभारत में साफ साफ लिखा कृष्ण जी यादव थे ।
5 आमतोर पर कहा जाता है कि कृष्ण जी ने 16000 शादिय की थी मगर सच ये है की प्राग्ज्योतिष के राजा नरकासुर ने 16000 राज कन्याओ को कैद कर रखा था श्री कृष्ण ने इस राक्षस को मारकर इन राजकन्याओ को आजाद करवाया और उनको समाजिक सुरक्षा देने के लिए आज के नारी निकेतन की तरह उनके रहने का प्रबध किया था । ये बात विष्णु पुराण और महाभारत में प्रमाणित है ।
6 तर्क दिया जाता है कि गंधारी के श्राप के कारण श्री कृष्ण के शरीर त्याग (सरस्वती नदी के तट पर) के बाद सारे यादव मर गये थे परन्तु आज भी भारत देश में यादव सबसे बड़ी जाति के रूप में मोजूद है हां श्री कृष्ण के बाद यादवी संघर्ष हुए थे (सोमनाथ के करीब) लेकिन उनमे कुछ मुर्ख यादव राजा मारे गये थे वहा आज भी 110 में से 88 गाव मोजूद है जो बादलपुरा अहीर से तलाला तक फेले है ।
7 कई जगह लिखा गया है कि समुद्र में मूसल चूर्ण डालने के कारण पटेरा(एक पणियर घास ) बना जिसकी मार से सारे यादव मारे गये थे लेकिन समुद्र किनारे प्रभास क्षेत्र मोजूद है और यादव भी मोजूद है तो फिर ये घास आज तलवार बनकर यादवों को क्यों नही मार रही..??
और जब मथुरा उत्तरप्रदेश से कृष्ण जगतगुरुम् हरीयाणा गुजरात गये साथ यादव सेना भी साथ चलने लगी गुजरात मे जहा जगह मिली वहा कृष्ण जी की यादव सेना रहने लगी तब प्रदेश से जाने जाते थे राजकोट मोरबी कच्छ प्रदेश मच्छु से जाना जाता था तब मच्छो यादव कहलाता और सोरठ मे रुके वो सोरठ के यादव पंचाल मे रुके वो पंच जन्म पंचोली यादव लेकीन हम तो कृष्ण के वंशज ऐक ही है हम क्यु पुरानि बातो का ठेका लेकर चलते है अभी भी तब हमारे बुजुर्गो जिन प्रदेश मे रहते थे वहा के यादव कहते थे मगर वो यादव नहि की हम अलग अलग है मगर उनका भी कारन है ये इस समय के व्यापारी मनुवादी सोच ने हमे पुरे भारत वर्ष मे जुदा करने का प्लान बनाया था क्यु की हिंदुस्तान मे सब से आबादी कृष्ण वंश यदुविरो की थी उनको पता था की ऐक समय वो हमारे पर राज करेंगे तब ही उस ने हमारे बिना पढे लीखे बुजुर्गो को जात मे बटवारे करवा दीये अब संभल ने का समय आ गया पुरे भा

 

Saturday, 24 December 2016

नोटबंदी की असली वजह


अभी हमने एक अखबार में पढ़ा की श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी पार्टी के वरिष्ट सहयोगी के नोटबंदी के प्रस्ताव पर कही थीं की हमारी पार्टी को आगे चुनाव नहीं लड़ना है क्या  ??????????????????
समझे पहले पार्टी प्यारी फिर देश  यही हमारी देश की बिडम्बना है जिसको जनता ने खुलकर फैसला लेने का पॉवर दिया(सालों बाद पूर्ण बहुमत)उसको उन्ही के द्वारा रोका जा रहा है जिसको साथ में जनता ने नकार दिया ।
आज हम आपको बता रहें है नोटबैन कि सच्चाई
कांग्रेसी सरकारों ने देश को खोखला कर दिया है खून चूस लिया है अंदर से बेकार हो गया है हमारा देश अगर हमें समय पर pm मोदी  जैसा देशभक्त डॉक्टर ना मिला होता तो ?????
हमारा देश 2021 तक महंगाई ,भूखमरी , आर्थिक संकट,भ्रस्टाचार आदि दिक्कतों से घिर जाता हमारा देश कमजोर हो जाता हम अपने सैनिकों को वेतन नहीं दे पाते हथियार नहीँ खरीदपाते  लड़ने की तो बात ही छोड़िये क्यों
की हमारे देश की आर्थिक वैल्यू दुनिया में कमजोर होती जा रही थी  क्यों की हमारे  देश में लगभग एक लाख करोड़ रुपये का जाली नोट बाजार में चल रहा था जो पांच सौ तथा एक हजार रुपये के सक्ल में थे जिसके डर की वजह से कोई विदेशी हमारा रुपया लेने से डरते थे इसीलिए हमारा रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता जा रहा था देखिये डॉलर के मुकाबले रुपये की किस के शासन में कितना कमजोर
1947 में 1 डालर = 1.00 रूपये
1966 में 1 डालर = 7.50 रूपये
1975 में 1 डालर = 8.40 रूपये
1984 में 1 डालर = 12.36 रूपये
1990 में 1 डालर = 17.50 रूपये
1991 में 1 डालर = 24.58 रूपये
1992 में 1 डालर = 28.97 रूपये
1995 में 1 डालर = 34.96 रूपये
2000 में 1 डालर = 46.78 रूपये
2001 में 1 डालर = 47.93 रूपये
2002 में 1 डालर = 48.98 रूपये
2003 में 1 डालर = 45.57 रूपये
2004 में 1 डालर = 43.84 रूपये
2005 में 1 डालर = 46.11 रूपये
2007 में 1 डालर = 44.25 रूपये
2008 में 1 डालर = 49.82 रूपये
2009 में 1 डालर = 46.29 रूपये
2010 में 1 डालर = 45.09 रूपये



2011 में 1 डालर = 51.10 रूपये
2012 में 1 डालर = 54.47
2014 में  1 डॉलर =61.66 रूपय       भाजपा के शासन (अटल जी) कल मैं रुपया काफी मजबूत हो गया था ----
2000 में 1 डालर = 46.78 रूपये
2001 में 1 डालर = 47.93 रूपये
2002 में 1 डालर = 48.98 रूपये
2003 में 1 डालर = 45.57 रूपये
2004 में 1 डालर = 43.84 रूपये    
    आज 9 नवम्बर को 66.85 रुपये है आप देख सकते है हमारे देश की हालत तथा 3लाख करोड़ का ब्लैक मनी भी तो मिली ।  उसे जाली नोट रूपी वायरस को शरीर रूपी देश से बाहर निकलना जरूरी था
या अपदेख रहे है आतंकवादी हमला काम ,कश्मीर में पत्थरबाजी बन्द ,अबतक 800 सौ से ज्यादा नक्सली का आत्मसमर्पण कई टन गैर कानूनी सोना जब्त  ।जरा ध्यान दीजिए सभी दल इस बड़ी उपलब्धि पर देश का ध्यान भटकाना चाहते हैं हमारा देश फिर स्वस्थ हो उठे इसलिए आपसे हाथ जोड़कर सहयोग दें बस एक महीने तक जय हिंद ।
आपका अजय यादव

Wednesday, 10 June 2015

सेना ने पहली बार दूसरे देश में घुसकर आतंकियो को मारा

. मणिपुर के चंदेल जिले में बीते
चार जून को सेना पर हमला करके 18 जवानों की जान
लेने वाले उग्रवादियों को मार गिराया गया है। भारतीय सेना
ने म्यांमार में जाकर उग्रवादियों के खिलाफ चुनिंदा ठिकानों पर कार्रवाई
की है। सेना ने मंगलवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस
बात की जानकारी दी। रिपोर्ट्स
के मुताबिक, केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद
म्यांमार को साथ लेकर उग्रवादियों के खात्मे का ऑपरेशन चलाया गया
और 15 उग्रवादियों को मार गिराया गया। सेना ने कहा कि देश
की एकता और अखंडता के लिए खतरा बने
किसी संगठन से निपटने के लिए हम तैयार हैं।
सीमा पार जाकर उग्रवादियों को ढेर किया
सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल रणधीर सिंह ने कहा कि
इंटेलिजेंस से मिले इनपुट के आधार पर उग्रवादी भारत
में हमले की बड़ी साजिश रच रहे थे। इंडो-
म्यांमार बार्डर पर छिपे उग्रवादियों के खात्मे के लिए हमने म्यांमार
सरकार से बात की। इसके बाद सीमा पार
जाकर नागालैंड और मणिपुर सीमा पर दो अलग-अलग
ठिकानों पर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। हमला करने वाले
उग्रवादियों के 2 ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा
कि पड़ोसी देश की सेना के साथ हमारे
अच्छे संबंध है, भविष्य में भी आतंकवाद से लड़ने के
लिए मदद ली जाएगी।
म्यांमार में ही क्यों हुई कार्रवाई?
म्यांमार से सटी भारत की सीमा
1643 किलोमीटर लंबी है। दोनों
सीमाओं के बीच आज तक फेंसिंग
नहीं हुई। दोनों देशों के सुरक्षा बल अपने इलाकों में 16
किलोमीटर अंदर तक आजादी से
आवाजाही करने की इजाजत देते हैं।
यही वजह है कि 4 जून को उग्रवादी
मणिपुर में हमला करने के बाद म्यांमार की तरफ भाग
निकले। पूर्वोत्तरी राज्यों में कम से कम 24
उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं। इनमें से अधिकतर के
ट्रेनिंग कैम्प म्यांमार और भूटान में हैं।
अपनी सरहद से बाहर हमारी सेना ने
कब चलाए ऑपरेशन?
- 1971 : पाकिस्तान से जंग के दौरान हमारी सेना
बांग्लादेश में घुसी और उसे आजाद कराया।
- 1987 : लिट्टे को बेअसर करने के लिए भारत ने अपने शांति रक्षा
बलों के 50 हजार जवानों को श्रीलंका के जाफना में
उतारा। हमारी सेना के 1200 जवान शहीद
हुए। अभियान 1990 तक चला।
- 1988 : तख्तापलट की कोशिशें नाकाम करने के लिए
मालदीव ने भारत से मदद मांगी। भारत ने
सेना के 1400 कमांडो माले में उतारे। विद्रोहियों का बड़े पैमाने पर
सफाया किया।
- 1995 : पूर्वोत्तर के उग्रवादियों के कैम्प नष्ट करने के लिए
सेना ने म्यांमार में प्रवेश किया। यह ऑपरेशन गोल्डन बर्ड
कहलाया। 40 उग्रवादियों को मार गिराया गया।
पड़ोसी देशों से कितनी मिली
है भारत को मदद?
- म्यांमार : म्यांमार ने इससे पहले 1995 में भारतीय
सेना के साथ ऑपेशन गोल्डन बर्ड चलाया था। इसके बाद 2001 में
उसने भारत के कहने पर फिर ऑपरेशन चलाया। 200 उग्रवादियों
को गिरफ्तार किया और 1500 हथियार बरामद किए।
- भूटान : रॉयल भूटान आर्मी ने 2003 में उल्फा,
एनडीएफबी और केएलओ उग्रवादियों के
खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। 150 उग्रवादी मार गिराए।
3000 उग्रवादियों को अपनी सीमाओं से
बाहर खदेड़ दिया। उल्फा के 14, बोडो के 11 और केएलओ के 4
कैम्प नष्ट कर दिए। भूटान समय-समय पर पूर्वोत्तर के
उग्रवादियों के खिलाफ अभियान चलाता है।
- बांग्लादेश : पूर्वी नगालैंड के उग्रवादियों के खिलाफ
बांग्लादेशी सेना कार्रवाई करती है। भारत
समर्थित शेख हसीना के प्रधानमंत्री होने
के चलते बांग्लादेश पूर्वोत्तर के उग्रवादी तत्वों को
पनाह नहीं देता।
- श्रीलंका : हाल के वर्षों में सैन्य रिश्ते बिगड़े हैं।
श्रीलंकाई सेना हमारे मछुआरों पर फायरिंग
करती रहती है। दक्षिण भारत में
अमेरिकी दूतावासों पर हमले की साजिश रच
रहा आईएसआई का एक एजेंट कोलंबो स्थित
पाकिस्तानी दूतावास में पिछले साल काम करता पाया गया।
भारतीय खुफिया एजेंसी और सरकार के
दबाव में श्रीलंका ने आईएसआई अफसर को पाकिस्तान
भेज दिया।
- पाकिस्तान : भारत के खिलाफ आतंक फैलाने के मामले में सबसे
आगे। आतंकियों के खिलाफ भारत की कभी
मदद नहीं की।
- चीन : अक्साई चीन में मौजूद पाकिस्तान
समर्थित आतंकियों पर कभी कार्रवाई नहीं
की। पूर्वोत्तर के उग्रवादियों को भी हथियार
मुहैया कराने का आरोप है।
उग्रवादियों ने किया था 33 साल का सबसे खतरनाक हमला
उग्रवादियों का यह हमला बीते 33 साल में मणिपुर में
सेना पर हुआ सबसे खतरनाक था। इससे पहले, 1982 में राज्य
में इसी तरह के हमले में 20 जवान
शहीद हुए थे। उस वक्त उग्रवाद चरम पर था। यह
भी पहली बार हुआ था कि उग्रवादियों ने
आरपीजी यानी रॉकेट लॉन्चर्स
का इस्तेमाल किया। नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड
(खपलांग) ने हमले की जिम्मेदारी
ली थी। यह संगठन नगा समुदाय
की ज्यादा आबादी वाले
पूर्वोत्तरी राज्यों को मिलाकर ग्रेटर नगालैंड बनाना चाहता
है। इस संगठन के साथ करीब 2000
उग्रवादी जुड़े हैं। मणिपुर के चंदेल सहित
पहाड़ी इलाकों में भी इस संगठन
की पैठ है। इसकी केंद्र सरकार के साथ
शांति वार्ता विफल हो चुकी है।